बनारस: पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का मणिकर्णिका घाट न केवल आस्था का बड़ा केंद्र है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर देशभर में प्रख्यात है. हाल के दिनों में इस ऐतिहासिक घाट के पुनर्विकास को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक और एआई से तैयार की गई तस्वीरें वायरल की गई.
इन पोस्ट्स ने लोगों को गुमराह किया और धार्मिक भावनाओं को आहत करने की कोशिश की. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं.
वाराणसी पुलिस ने मणिकर्णिका घाट से जुड़ी भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर ऐसे दावे किए गए, जो हकीकत से बिल्कुल अलग थे. इन पोस्ट के जरिए घाट के सौंदर्यीकरण कार्य को गलत रूप में पेश किया गया.
पुलिस जांच में सामने आया है कि वायरल की गई कई तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाई गई थी. इन तस्वीरों में देवी-देवताओं से जुड़ी भावनात्मक चीजों को जोड़कर गलत संदेश फैलाया गया. अधिकारियों के अनुसार, इसका मकसद धार्मिक भावनाएं भड़काना और समाज में तनाव पैदा करना था.
तमिलनाडु निवासी एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर चौक थाने में मामला दर्ज किया गया है. शिकायत करने वाले व्यक्ति की कंपनी नवंबर 2025 से घाट पर शवदाह सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम कर रही है. शिकायतकर्ता के अनुसार, 16 जनवरी की रात सोशल मीडिया पर डाले गए पोस्ट्स ने श्रद्धालुओं को भ्रमित किया और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की.
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया. उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट या काशी में किसी भी मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि एआई से बनी सामग्री का इस्तेमाल कर विकास कार्यों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जिसे जनता समझ रही है.
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि घाट की परंपरा और सांस्कृतिक संरचनाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं. शवदाह के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं, लकड़ी के भंडारण की व्यवस्था सुधारी जा रही है और राख निपटान के लिए आधुनिक व्यवस्था की जा रही है. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वालों पर आगे भी कड़ी कार्रवाई होगी.