वाराणसी: पूर्वी उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर जल्द ही मधुमक्खी गलियारे बनाए जाएंगे. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की इस नई पहल से न सिर्फ पर्यावरण को फायदा पहुंचेगा, बल्कि किसानों की किस्मत भी चमकेगी. मधुमक्खियों की संख्या बढ़ने से फसलों का परागण बेहतर होगा और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी.
NHAI अब हाईवे को सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता का केंद्र बनाने जा रहा है. योजना के तहत हाईवे के दोनों किनारों पर फूलों वाले, फलदार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे. ये पौधे मधुमक्खियों को पूरे साल भोजन और आश्रय उपलब्ध कराएंगे. विशेष रूप से नीम, करंज, महुआ, पलाश, जामुन और सिरिस जैसे देशी पेड़ों को चुना गया है, क्योंकि ये मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं और कम पानी में भी अच्छे से बढ़ते हैं.
NHAI ने तय किया है कि हाईवे पर हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर विशेष वृक्ष समूह विकसित किए जाएंगे. इससे मधुमक्खियां आसानी से चारा खोज सकेंगी और एक जगह से दूसरी जगह तक सुरक्षित रूप से घूम सकेंगी. इस परियोजना के लिए वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, गोरखपुर, प्रयागराज, रायबरेली और अयोध्या सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों को चुना गया है. इन सभी क्षेत्रों की परियोजना इकाइयों को NHAI ने विशेष निर्देश जारी कर दिए हैं.
मधुमक्खियां फसलों के परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, अच्छे परागण से फल, सब्जी और अनाज की पैदावार 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. इस कॉरिडोर से आसपास के गांवों के किसान सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे. साथ ही मधुमक्खी पालन (एपिकल्चर) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का जरिया भी मिल सकेगा. इस पहल से हाईवे के किनारे सूखे और बंजर पड़े इलाकों में हरियाली बढ़ेगी. धूल-मिट्टी कम होगी और हवा शुद्ध होगी. जैव विविधता बढ़ने से पक्षी, तितलियां और अन्य छोटे जीव-जंतु भी अपने आप बढ़ेंगे.