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UP में छुट्टा पशुओं पर सख्त हुआ हाईकोर्ट! सरकार को 2 हफ्ते में देना होगा पूरा प्लान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP सरकार को छुट्टा पशुओं और लावारिस कुत्तों की समस्या पर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है. अदालत ने दो सप्ताह में संस्थागत क्षेत्रों की सूची बनाकर प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
UP में छुट्टा पशुओं पर सख्त हुआ हाईकोर्ट! सरकार को 2 हफ्ते में देना होगा पूरा प्लान
Courtesy: AI

उत्तर प्रदेश में छुट्टा पशुओं और लावारिस कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा और पशुओं के बेहतर प्रबंधन के लिए ठोस योजना तैयार करना जरूरी है. इसी उद्देश्य से कोर्ट ने राज्य सरकार को व्यापक कार्ययोजना बनाने और दो सप्ताह के भीतर जिला व निकायवार संस्थागत क्षेत्रों की सूची तैयार करने का आदेश दिया है. मामले में केंद्र सरकार और एनएचएआई को भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.

दो सप्ताह में तैयार होगी संस्थानों की सूची

जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सरकारी और निजी शिक्षण संस्थान, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, खेल परिसर तथा अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए. अदालत ने कहा कि सूची उपयोग और महत्व के आधार पर तैयार हो, ताकि प्रभावी प्रबंधन की योजना बनाई जा सके.

केंद्र सरकार और एनएचएआई को भी निर्देश

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से उत्तर प्रदेश में उसके नियंत्रण वाले सभी संस्थानों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है. साथ ही एनएचएआई और राज्य सरकार को राष्ट्रीय राजमार्गों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं की पहचान, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन और उपचार की व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

पार्क और मैदानों पर भी रहेगा फोकस

अदालत ने कहा कि पार्कों और सार्वजनिक मैदानों में लावारिस कुत्तों के प्रबंधन के लिए भी प्रभावी उपायों पर विचार किया जाए. न्यायालय का मानना है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बेहतर व्यवस्था से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और पशुओं के संरक्षण की जिम्मेदारी भी संतुलित तरीके से निभाई जा सकेगी.

संतुलित व्यवस्था पर कोर्ट का जोर

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उद्देश्य केवल समस्या का समाधान नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें आम नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों का ध्यान रखा जाए. अदालत ने सरकार से समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा जताई है और कहा है कि सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम करें, ताकि भविष्य में इस समस्या का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके.