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India Daily

'हारे का सहारा खाटू श्यामा हमारा', इस नारे के साथ 1000 कीलों पर 160 किमी की दंडवत यात्रा कर रहा ये खास भक्त

खाटू श्यामा बाबा एक दरबार में हर दिन हजारो भक्त पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक की चर्चा काफी तेज हो गई है. जिसमें वह 1000 नुकीली लोहे की कीलों से बने लकड़ी के फट्टे पर लेटकर यह सफर तय कर रहा है.

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Edited By: Shanu Sharma
'हारे का सहारा खाटू श्यामा हमारा', इस नारे के साथ 1000 कीलों पर 160 किमी की दंडवत यात्रा कर रहा ये खास भक्त
Courtesy: Grok AI

हारे का सहारा खाटू श्यामा हमारा, इसी नारे के साथ हर भक्त बाबा खाटू श्याम के दरबार पर पहुंचते हैं. बाबा पर भरोसा ऐसा की भक्तों कई किलोमीटर तक चल कर आते हैं. लेकिन आज कल एक ऐसे भक्त की चर्चा काफी ज्यादा हो रही है, जो 160 किलोमीटर की दंडवत यात्रा कर के बाबा के दरबार पहुंच रहे हैं. 

खाटू श्याम के दरबार पहुंच रहे इस भक्त का नाम नितेश है. उन्होंने खाटू श्याम जी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा दिखाते हुए 160 किलोमीटर लंबी दंडवत यात्रा शुरू की है. वह 1000 नुकीली लोहे की कीलों से बने लकड़ी के फट्टे पर लेटकर यह सफर तय कर रहे हैं, यह उनकी दूसरी ऐसी यात्रा है.

कौन है नीतेश अलवर?

नितेश अलवर के अशोक टॉकीज क्षेत्र के निवासी हैं. उन्होंने बीते गुरुवार को अलवर के शिवाजी पार्क स्थित खाटू श्याम मंदिर से यात्रा शुरू की. जिस नुकीले फट्टा पर वह इस यात्रा को शुरू किए हैं, वह  करीब 3 फुट चौड़ा है. इसमें 1000 तेज नुकीली कीलें लगी हैं. पिछले साल उन्होंने 501 कीलों वाला फट्टा इस्तेमाल किया था, इस बार संख्या दोगुनी कर दी. यात्रा करीब डेढ़ महीने में पूरी होगी. रोजाना वे लगभग 8 किलोमीटर दंडवत करते हैं.

नितेश कैटरिंग का काम करते हैं. पांच साल पहले तक वे बाबा श्याम को नहीं जानते थे, एक दिन मुश्किल में पड़कर दोस्तों के साथ पैदल निशान लेकर खाटू श्याम गए. वहां दर्शन के बाद उनकी आस्था जागृत हुई. तब से वे भक्ति में डूब गए.

सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

परिवार की ओर से शुरुआत में इस जोखिम भरी यात्रा का विरोध किया गया, लेकिन नितेश की जिद के आगे सब मान गए. अब परिवार वाले भी उनका साथ दे रहे हैं. उनके साथ दोस्त और परिवार के करीब 15 लोग पैदल चल रहे हैं. वे रास्ते में रुकने, खाने-पीने की व्यवस्था देखते हैं. नितेश कहते हैं कि दंडवत के दौरान उन्हें कोई तकलीफ महसूस नहीं होती.

दर्द का एहसास भी नहीं होता, सब कुछ बाबा श्याम के आर्शीवाद से होता है. वे मानते हैं कि यह उनकी आस्था का सफर है. कीलों पर लेटकर आगे बढ़ना उनके लिए भक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है. इस अनोखी यात्रा की खबर सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तेजी से फैल रही है. लोग नितेश की भक्ति की तारीफ कर रहे हैं. हर दिन हजारो भक्त बाबा के दरबार में अपनी आस्था के साथ पहुंचते हैं.