जयपुर: राजस्थान के जयपुर में तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जोरदार जुबानी हमला किया है. गुरुवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने ममता बनर्जी पर सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक के लिए राजनीति करने और राज्य में हिंदू भावनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज करने का आरोप लगाया.
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा, 'ममता बनर्जी अब सिर्फ नाम की बनर्जी रह गई हैं.' उनके अनुसार, उनकी राजनीति अब संतुलित नहीं रही और पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टीकरण पर केंद्रित है. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है और उनकी धार्मिक भावनाओं और अधिकारों का सम्मान नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के राजनीतिक फैसले वोट बैंक की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमते हैं, जहां हिंदू आवाजों की कोई कीमत नहीं रह गई है.
Jaipur, Rajasthan: On Chief Minister Mamata Banerjee, Jagadguru Rambhadracharya says, "She is completely supporting the Muslims; Banerjee is just in name only" pic.twitter.com/bbskAihnQG
— IANS (@ians_india) January 8, 2026
इससे पहले, रामभद्राचार्य ने बंगाल में बाबर के नाम पर मस्जिद बनाए जाने के मुद्दे पर भी ममता बनर्जी को निशाना बनाया था. उस समय, उनके बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. उन्होंने कहा था, 'मैं अब ममता बनर्जी को अपनी बहन नहीं कह सकता. वह अब हमारी बहन नहीं रही. अब वह देशद्रोहियों की बहन है.' इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में खूब चर्चा हुई थी.
अपनी आलोचना जारी रखते हुए, रामभद्राचार्य ने ममता बनर्जी पर उन लोगों का समर्थन करने का आरोप लगाया, जिन्होंने उनके अनुसार, इतिहास में हिंदुओं पर अत्याचार किया था. उन्होंने जयचंद, मान सिंह, मोहम्मद गोरी, चंगेज खान और महमूद गजनवी जैसे ऐतिहासिक लोगों का नाम लिया. उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसे हमलावरों की मानसिकता का समर्थन करते हैं, उनसे उनका कोई रिश्ता नहीं हो सकता.
धार्मिक ढांचों पर अपना रुख साफ करते हुए, जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि हिंदुओं को मस्जिदों के निर्माण से कोई दिक्कत नहीं है. हालांकि, उन्होंने किसी भी मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर रखने पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि बाबर ने भारत पर हमला किया था और इसलिए उसके नाम पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती. उन्होंने ममता बनर्जी से इस भावना को ध्यान से सुनने के लिए कहा.
इन बयानों के बाद राजनीतिक तनाव तेजी से बढ़ गया है. रामभद्राचार्य के समर्थक उनके बयानों को हिंदू भावनाओं की आवाज बता रहे हैं, जबकि आलोचक उन्हें बांटने वाले और चुनाव से प्रेरित बयान बता रहे हैं. विपक्षी नेताओं ने उन पर राजनीतिक फायदे के लिए मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति को और गरमा सकता है. आने वाले दिनों में सभी तरफ से कड़ी प्रतिक्रियाएं और जवाबी बयान आने की उम्मीद है, जिससे यह विवाद एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा.