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पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब में BJP का मास्टरप्लान, बिट्टू बनेंगे यहां के शुभेंदु अधिकारी; 117 सीटों पर अकेले उतरने की तैयारी

भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी मिशन मोड में शुरू कर दी है. पार्टी ने सिख नेता केवल सिंह ढिल्लो को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राज्य में पूरा वक्त देने का निर्देश दिया है.

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Edited By: Reepu Kumari
पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब में BJP का मास्टरप्लान, बिट्टू बनेंगे यहां के शुभेंदु अधिकारी; 117 सीटों पर अकेले उतरने की तैयारी
Courtesy: Pinterest

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की तरह एक चेहरा ढूंढ रही है भाजपा, जो पंजाब की सियासी जमीन पलट दे. अगले साल विधानसभा चुनाव में बिना गठबंधन के सभी 117 सीटों पर लड़ने जा रही पार्टी पुरानी दलों के असंतोष को भुनाने की रणनीति बना रही है. क्या पंजाब में भी बंगाल जैसा चमत्कार होगा? 

पंजाब की राजनीति इन दिनों गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है. जहां कभी भाजपा की अपनी सरकार नहीं बनी, वहां अब भगवा पार्टी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने को तैयार है. स्थानीय निकाय चुनावों में मिले फीडबैक और सिख समुदाय में बढ़ती पैठ को लेकर पार्टी का आत्मविश्वास चरम पर है. 

पंजाब का 'शुभेंदु' कौन बनने जा रहा है?

पश्चिम बंगाल में जो चमत्कार भारतीय जनता पार्टी ने किया, उसकी पटकथा अब पंजाब में लिखी जा रही है. 2026 के बंगाल चुनाव में जिस पार्टी को कभी हाशिये पर धकेल दिया गया था, उसने दो तिहाई बहुमत से सरकार बना ली. उसी जीत के हौसले पर सवार भाजपा ने अब पंजाब को अपना अगला बड़ा लक्ष्य घोषित कर दिया है.

पंजाब में आज तक भाजपा की अपनी सरकार कभी नहीं बनी. लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने जो बिसात बिछाई है, वह बताती है कि इस बार कुछ अलग होने वाला है. पार्टी सभी 117 सीटों पर बिना किसी गठबंधन के चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुटी है.

जब बंगाल का फॉर्मूला पंजाब पहुंचा

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सफलता के पीछे एक बड़ा नाम था-शुभेंदु अधिकारी, जो तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और पार्टी की रीढ़ बन गए. अब पंजाब में यही भूमिका निभाने के लिए कांग्रेस से आए रवनीत सिंह बिट्टू को आगे किया जा रहा है. केंद्र सरकार में मंत्री बिट्टू को राज्य में पूरा समय देने का निर्देश दिया गया है और वे विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगे.

सिखों तक पहुंचने की कोशिश

पंजाब में भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही है कि वह अकाली दल के साथ गठबंधन के कारण सिख समुदाय और ग्रामीण इलाकों में कभी अपनी स्वतंत्र पहचान नहीं बना पाई. शहरी हिंदू मतदाताओं तक सिमटी भाजपा अब इस दीवार को तोड़ना चाहती है. इसी सोच के साथ पार्टी ने सिख नेता केवल सिंह ढिल्लो को पंजाब भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.

हिंदू वोटबैंक भी साधा

सिखों तक पहुंचने के साथ-साथ पार्टी अपने परंपरागत हिंदू मतदाता आधार को भी मजबूत रखना चाहती है. इसके लिए वरिष्ठ नेता तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा में लाकर पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी का यह दोहरा दांव-सिख और हिंदू दोनों समुदायों को साथ लेकर चलने की रणनीति-2027 की असली चाबी मानी जा रही है.

विपक्ष कमजोर, भाजपा को फायदा?

पंजाब में राजनीतिक हालात भाजपा के लिए मुफीद होते दिख रहे हैं. 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी, जबकि कांग्रेस 18 और अकाली दल महज तीन सीटों पर सिमट गया था. भाजपा को तब केवल दो सीटें मिली थीं. लेकिन अब सरकार के खिलाफ जनता में जो नाराजगी है, उसे भाजपा अपने पक्ष में भुनाना चाहती है.

नए चेहरे, नई उम्मीद

भाजपा की जड़ें मजबूत करने में नए चेहरों की भी अहम भूमिका है. कांग्रेस से कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे दिग्गज पहले ही पार्टी में आ चुके हैं. हाल ही में आम आदमी पार्टी से राघव चढ्ढा समेत कई नेता भी भाजपा से जुड़े हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जनता कांग्रेस, अकाली दल और आप-तीनों को आजमा चुकी है. अब वह बदलाव चाहती है और भाजपा उस बदलाव का चेहरा बनने के लिए तैयार है.