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पंजाब सरकार का किसानों को तोहफा, सीवर के बजाय अब खेतों तक पहुंचेगा ट्रीटमेंट प्लांट का साफ पानी

जगराओं में नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन किया गया. अब साफ किया गया पानी सीवर में बहाने के बजाय खेतों तक पहुंचाया जाएगा.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
पंजाब सरकार का किसानों को तोहफा, सीवर के बजाय अब खेतों तक पहुंचेगा ट्रीटमेंट प्लांट का साफ पानी
Courtesy: X

पंजाब सरकार ने पानी और जमीन बचाने की दिशा में एक नई पहल की है. जगराओं में नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के शुरू होने से अब शुद्ध किया गया पानी किसानों के खेतों तक पहुंचेगा. इससे सिंचाई आसान होगी, भूजल पर दबाव कम होगा और खेती को नया सहारा मिलेगा.

जगराओं में शुरू हुआ नया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट

पंजाब के जगराओं में नए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल ने किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार पानी के सही उपयोग और जमीन के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि इस परियोजना का मकसद केवल गंदे पानी को साफ करना नहीं है, बल्कि उसे दोबारा उपयोग में लाना भी है. इससे पहले साफ किया गया पानी सीधे सीवर में छोड़ दिया जाता था, जिससे उसका कोई उपयोग नहीं हो पाता था. अब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है ताकि साफ पानी किसानों तक पहुंच सके और खेती में इस्तेमाल हो.

1,065 एकड़ जमीन को मिलेगा सिंचाई का लाभ

नई व्यवस्था के तहत ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला साफ पानी अब खेतों तक पहुंचाया जाएगा. सरकार के अनुसार, इससे जगराओं क्षेत्र की करीब 1,065 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी. इससे किसानों को पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और उन्हें केवल भूजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. गर्मी और कम बारिश के समय भी खेती के लिए पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद है. इस पहल से खेती की लागत कम करने के साथ-साथ पानी के बेहतर इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा. किसानों को इससे लंबे समय तक फायदा मिलने की संभावना है.

जल संरक्षण के साथ पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि साफ किए गए पानी का दोबारा उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम है. इससे सीवर में पानी की बर्बादी रुकेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की परियोजनाएं भूजल स्तर को बचाने में मदद करती हैं. साथ ही खेती के लिए वैकल्पिक जल स्रोत तैयार होते हैं. सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं.