पंजाब में गर्मी का असर अब बिजली व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. धान की खेती के लिए बढ़ती सिंचाई और तेज तापमान के चलते बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है. रिकॉर्ड खपत के बीच राज्य को अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है.
भीषण गर्मी और धान की रोपाई के मौसम ने पंजाब की बिजली व्यवस्था पर बड़ा दबाव बना दिया है. सोमवार को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 16,130 मेगावाट दर्ज की गई, जो इस सीजन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. बिजली विभाग के अनुसार दोपहर के समय खपत सबसे अधिक रही. बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को केंद्रीय पूल से तय सीमा से अधिक बिजली लेनी पड़ रही है. इसके साथ ही राज्य के अपने बिजलीघरों से भी लगातार उत्पादन किया जा रहा है लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच अंतर पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है.
राज्य की निर्धारित बिजली ड्रॉअल सीमा 10,350 मेगावाट है लेकिन मौजूदा समय में पंजाब करीब 10,605 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड से प्राप्त कर रहा है।.वहीं, लहरा मोहब्बत, गोइंदवाल, रोपड़, राजपुरा और तलवंडी साबो जैसे ताप बिजलीघरों से हजारों मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. जलविद्युत परियोजनाओं से भी बिजली मिल रही है. इसके बावजूद विभाग को बिजली एक्सचेंज से ऊंची कीमतों पर अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है.
बिजली की कमी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है. धान की फसल के लिए इस समय लगातार सिंचाई जरूरी है लेकिन कई क्षेत्रों में पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है. कई जगह किसानों ने बिजली ग्रिडों के बाहर प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है और नियमित सप्लाई की मांग की है. दूसरी ओर शहरों और कस्बों में भी बार-बार बिजली कटौती हो रही है. लंबे कट के कारण लोगों को गर्मी में काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है. कूलर, पंखे और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. विभाग का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और मांग के अनुसार आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश जारी है.