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43,520 गुप्त सूचनाएं, 21,962 गिरफ्तारियां... पंजाब में जनता बना नशा तस्करों का सबसे बड़ा दुश्मन, व्हाट्सएप और ई-रिक्शा के जाल में फंसे नशा तस्कर

पंजाब में नशा विरोधी अभियान अब आम लोगों की गुप्त सूचनाओं के सहारे नई गति पकड़ रहा है. व्हाट्सएप हेल्पलाइन और ई-रिक्शा सूचना तंत्र से मिली जानकारी के आधार पर हजारों मामले दर्ज हुए और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
43,520 गुप्त सूचनाएं, 21,962 गिरफ्तारियां... पंजाब में जनता बना नशा तस्करों का सबसे बड़ा दुश्मन, व्हाट्सएप और ई-रिक्शा के जाल में फंसे नशा तस्कर
Courtesy: AI

पंजाब सरकार ने नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस कार्यवाही के साथ जनभागीदारी को भी मजबूत हथियार बनाया है. सेफ पंजाब व्हाट्सएप हेल्पलाइन और गांवों तक पहुंच रहे ई-रिक्शा सूचना अभियान के जरिए लोग बिना पहचान उजागर किए नशा कारोबार से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से पुलिस को नए सुराग मिल रहे हैं और ऐसे इलाकों तक भी पहुंच बन रही है, जहां पहले कार्यवाही करना मुश्किल माना जाता था.

गुप्त सूचनाओं से तेज हुई कार्यवाही

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 43,520 गुप्त सूचनाएं प्राप्त हुई हैं. जांच के बाद 17,120 मामले दर्ज किए गए और 21,962 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों का कहना है कि हर सूचना का पहले सत्यापन किया जाता है. सही पाए जाने पर संबंधित जिला पुलिस को तुरंत कार्यवाही के लिए भेजा जाता है.

व्हाट्सएप हेल्पलाइन बनी अहम माध्यम

'युद्ध नशियां विरुद्ध' अभियान के तहत शुरू की गई सेफ पंजाब व्हाट्सएप हेल्पलाइन लोगों को सुरक्षित तरीके से सूचना देने का विकल्प दे रही है. पहचान पूरी तरह गोपनीय रखे जाने के कारण अधिक लोग आगे आ रहे हैं. पुलिस का मानना है कि इससे नशा तस्करों के नेटवर्क तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हुआ है.

गांवों तक पहुंचा ई-रिक्शा अभियान

अभियान के दूसरे चरण में ई-रिक्शा सूचना तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. पुलिस और प्रशासन के ई-रिक्शा अब तक करीब 3,440 गांवों तक पहुंच चुके हैं. इनके माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ स्थानीय स्तर पर गुप्त सूचनाएं भी एकत्र की जा रही हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसा और सहयोग दोनों बढ़ा है.

जनभागीदारी को मिल रही प्राथमिकता

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में एक ही सूचना से कई आरोपितों तक पहुंच बनाई गई. इसलिए गिरफ्तारियों की संख्या दर्ज मामलों से अधिक रही. सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था ने लोगों का विश्वास बढ़ाया है और अभियान को नई मजबूती मिली है.

स्थायी समाधान पर सरकार का जोर

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि समाज नशामुक्त पंजाब चाहता है. वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. जागरूकता, पुनर्वास और जनसहयोग को समान महत्व देकर ही नशे के खिलाफ स्थायी सफलता हासिल की जा सकती है.