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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे चोरी घोटाला, SIT रिपोर्ट में हुए कई अहम खुलासे

उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम चोरी करने का मामला अब संगठित घोटाले में बदल गया है. विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा की गंभीर खामियों और कर्मचारियों द्वारा चोरी का पर्दाफाश किया है

Shilpa Shrivastava
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे चोरी घोटाला, SIT रिपोर्ट में हुए कई अहम खुलासे
Courtesy: X

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम चोरी करने का मामला अब संगठित घोटाले में बदल गया है. विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा की गंभीर खामियों और कर्मचारियों द्वारा चोरी का पर्दाफाश किया है. 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच 40 दिनों के सीसीटीवी फुटेज में काउंटिंग रूम के कर्मचारियों द्वारा 70 बार चोरी करते हुए पकड़े गए हैं. कर्मचारी नोटों की गड्डियां कपड़ों, जूतों और जेबों में छुपाकर ले जाते थे. 

कौन-कौन था मामले में शामिल?

मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला और टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव ने सबसे ज्यादा चोरी की. उनके साथ अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा और करुणेश पांडे ने मदद की. इनके बैंक खातों में अचानक बड़ी रकम जमा हुई और एफडी करवाई गई. 4 जून को बाथरूम से 2.25 लाख रुपये भी बरामद हुए.

SIT रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट ने सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन तक नहीं किया. काउंटिंग रूम में कर्मचारियों की तलाशी रैंडम कर दी गई थी. जेब रहित वेशभूषा का नियम लागू नहीं था. मोबाइल फोन और चाबियां ले जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी. हुंडी (दानपात्र) की गिनती का कोई लेखा-जोखा नहीं था. बायोमैट्रिक अटेंडेंस और खाने-पीने की चीजों पर भी कोई रोक नहीं थी.

ट्रस्ट प्रतिनिधि की लापरवाही:

वित्तीय जिम्मेदारी संभालने वाले डॉ. अनिल मिश्रा को कर्मचारियों की तलाशी न होने की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई लिखित आदेश नहीं दिया. प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव ने भी अनुशासन बनाए रखने में लापरवाही बरती. SIT ने टिन्नू यादव को आपराधिक साजिश रचने, चोरी में मदद करने और उकसाने का दोषी पाया है. उसकी सिफारिश पर उसका भतीजा मनीष 15 अप्रैल से काउंटिंग रूम में ड्यूटी करने लगा था.