पंजाब के कुख्यात जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के सदस्य नितिश कौशल उर्फ लाला की अमेरिका में गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता दिलाई है. वह कनाडा भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सीमा पर ही पकड़ लिया गया. जांच में सामने आया कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था. अब अमेरिकी एजेंसियां उससे पूछताछ कर गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और अन्य सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.
जांच दस्तावेजों के अनुसार नितिश कौशल ने सीमा से कुछ दूरी पहले अपनी कार छोड़ दी और पैदल कनाडा में दाखिल होने की कोशिश की. कनाडा के सुरक्षा अधिकारियों को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं. सूचना मिलते ही अमेरिकी सीमा सुरक्षा एजेंसियों ने कार्यवाही की और वर्मोंट क्षेत्र में उसे गिरफ्तार कर लिया.
गिरफ्तारी के समय उसने न्यू जर्सी का फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस दिखाकर अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया. हालांकि उंगलियों के निशान और शरीर पर बने शेर के टैटू के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि हो गई. इससे पहले एक स्थानीय किसान ने भी उसके संदिग्ध रूप से घूमने की सूचना पुलिस को दी थी.
वर्मोंट की संघीय अदालत में पेश किए गए नितिश कौशल ने स्वीकार किया कि गिरफ्तारी वारंट उसी के नाम पर जारी हुआ था. उस पर संगठित अपराध, रंगदारी, अपहरण, हत्या, हथियारों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर आरोप हैं. दोष साबित होने पर उसे आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है.
नितिश कौशल का नाम अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी की हालिया कार्रवाई में भी सामने आया है. इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के अन्य सदस्यों और पंजाब पुलिस के एक इंस्पेक्टर का भी उल्लेख किया गया है. इसके बाद पंजाब की राजनीति में भी इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है.
जांच एजेंसियों का मानना है कि नितिश कौशल से पूछताछ के जरिए गिरोह के विदेशी नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है. अधिकारियों के अनुसार यह गिरफ्तारी संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई की महत्वपूर्ण कड़ी है और आने वाले दिनों में कई नए खुलासे हो सकते हैं.