मोहाली की बहुचर्चित एयरोट्रोपोलिस परियोजना से जुड़े भूमि मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने अधिग्रहित जमीन के बदले विकसित प्लॉट देने का फॉर्मूला तैयार कर लिया है. इसके तहत दो अलग-अलग मॉडल बनाए गए हैं, जिनमें कुछ पात्र भूमि मालिकों को रिहायशी प्लॉट के साथ कॉमर्शियल प्लॉट का विकल्प भी मिलेगा.
पुड्डा भवन, सेक्टर-62 में मुख्य प्रशासक की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में एयरोट्रोपोलिस के पॉकेट E से J तक के प्लॉट आकार और आवंटन मॉडल पर विस्तृत चर्चा की गई. पहले मॉडल में केवल रिहायशी प्लॉट देने का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि दूसरे मॉडल में रिहायशी और कॉमर्शियल दोनों प्रकार के प्लॉट देने का विकल्प शामिल किया गया है.
गमाडा के प्रस्ताव के अनुसार—
इस मॉडल का उद्देश्य हर श्रेणी के भूमि मालिक को उसकी पात्रता के अनुसार विकसित रिहायशी प्लॉट उपलब्ध कराना है.
दूसरे मॉडल में कुछ भूमि मालिकों को रिहायशी प्लॉट के साथ कॉमर्शियल प्लॉट देने का प्रस्ताव है.
इसके तहत—
कुछ श्रेणियों में स्पेशल एलओआई (Letter of Intent) का भी प्रावधान रखा गया है.
गमाडा ने यह भी तय किया है कि जिन लाभार्थियों को एक से अधिक प्लॉट मिलेंगे, वे 2000 वर्ग गज तक के प्लॉट का बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के एकीकरण (Amalgamation) करा सकेंगे. इससे बड़े आकार का एकल प्लॉट विकसित करना आसान होगा. गमाडा ने हाल ही में एयरोट्रोपोलिस परियोजना के तहत मटरां, बाकरपुर, सियाऊं, बड़ही, पट्टों, कुर्ड़ी, छत और किशनपुरा गांवों की अधिग्रहित भूमि के लिए अवार्ड घोषित किए हैं. प्रभावित भूमि मालिकों के लिए प्रति एकड़ 6.29 करोड़ रुपये से 8.29 करोड़ रुपये तक मुआवजा तय किया गया है.