फिल्म सतलुज को लेकर चल रहे विवाद के बीच जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है. मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह के पते के सत्यापन को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस और कानूनी चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है.
नाभा ओपन एग्रीकल्चरल जेल प्रशासन ने पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह के वर्तमान पते का सत्यापन कराने के लिए पंजाब पुलिस को पत्र भेजा था. इसके बाद होशियारपुर पुलिस ने रिकॉर्ड में दर्ज पते पर जांच की, लेकिन वह वहां नहीं मिले. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जेल रिकॉर्ड में उनके एक से अधिक पते दर्ज हो सकते हैं, इसलिए अन्य स्थानों की जानकारी भी खंगाली जा रही है.
जसपाल सिंह के अधिवक्ता गगनदीप सिंह घिरे ने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल लापता नहीं हैं. उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के बाद वह पंजाब में अपने बेटे के साथ जालंधर में रह रहे हैं. वकील के अनुसार उन्होंने अदालत के सभी निर्देशों का पालन किया है और नगर निगम की ओर से उनके पते का सत्यापन भी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराया जा चुका है.
यह मामला सामने आने के बाद पंजाब की राजनीति भी गर्मा गई है. शिरोमणि अकाली दल ने राज्य सरकार पर दोषियों के प्रति नरमी बरतने का आरोप लगाया है. वहीं, आम आदमी पार्टी सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई को मंजूरी नहीं दी गई और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.