पंजाब के सीमावर्ती इलाकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली कादियां-बीस रेल लाइन अब हकीकत बनने की ओर बढ़ रही है. लंबे समय से लंबित इस परियोजना को केंद्र सरकार ने 1,400 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी है. करीब 40 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को क्षेत्र की विकास जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है. वर्षों तक फाइलों में अटकी रहने के बाद अब इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे लोगों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी.
रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के अनुसार, इस रेल लाइन का विचार पहली बार वर्ष 1928 में सामने आया था. यानी यह परियोजना लगभग 100 वर्षों से चर्चा में रही, लेकिन विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी. उन्होंने कहा कि दिसंबर में इस योजना को फिर से सक्रिय किया गया और अब इसे लागू करने के लिए आवश्यक मंजूरी भी मिल गई है. लंबे इंतजार के बाद परियोजना के आगे बढ़ने से स्थानीय लोगों में उत्साह देखा जा रहा है.
ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਵੱਲ ਇੱਕ ਹੋਰ ਵੱਡਾ ਕਦਮ ਪੁੱਟਦਿਆਂ ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸਦੀ ਪੁਰਾਣੇ ਕਾਦੀਆਂ-ਬਿਆਸ ਰੇਲ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਨੂੰ ਮੁੜ ਸੁਰਜੀਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ₹1,400 ਕਰੋੜ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਇਹ ਨਵੀਂ 39.68 ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਲੰਬੀ ਰੇਲਵੇ ਲਾਈਨ ਮਾਝਾ ਖੇਤਰ ਦੀ ਆਰਥਿਕਤਾ, ਧਾਰਮਿਕ ਸੈਰ-ਸਪਾਟੇ ਅਤੇ ਖੇਤਰੀ ਵਿਕਾਸ ਨੂੰ ਨਵੀਆਂ ਉਚਾਈਆਂ 'ਤੇ ਲੈ… pic.twitter.com/snPlNmLgdy
— BJP PUNJAB (@BJP4Punjab) June 18, 2026
परियोजना की लागत समय के साथ कई गुना बढ़ चुकी है. शुरुआती दौर में जहां इसके लिए लगभग 200 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 1,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत में हुई वृद्धि इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं. अधिकारियों का मानना है कि यदि परियोजना समय पर शुरू हो जाती तो लागत काफी कम रहती.
इस रेल लाइन के निर्माण के लिए 411.81 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी. पहले जिस जमीन की कीमत करीब 33 करोड़ रुपये आंकी गई थी, उसकी मौजूदा लागत लगभग 300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. जमीन की बढ़ती कीमतों और मुआवजा नीतियों में बदलाव के कारण यह अंतर देखने को मिला है. प्रशासन अब भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना का पूरा खर्च केंद्र वहन करेगा और पंजाब सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा. रेल लाइन बनने से सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा व्यापार, रोजगार और परिवहन सुविधाओं में सुधार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय विकास को मजबूती मिलेगी.