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बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में 1,000 करोड़ की मशीन खरीद पर ED की नजर, 100 से ज्यादा अधिकारियों का वेतन रोका

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में करीब 1,000 करोड़ रुपये की मशीन खरीद अब ED की जांच के घेरे में है. नियुक्तियों पर भी सवाल उठे हैं और 100 से ज्यादा अधिकारियों का वेतन रोका गया है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में 1,000 करोड़ की मशीन खरीद पर ED की नजर, 100 से ज्यादा अधिकारियों का वेतन रोका
Courtesy: X

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में पिछले तीन वर्षों के दौरान खरीदी गई मेडिकल मशीनों को लेकर जांच तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इस मामले में पड़ताल शुरू की है. बताया जा रहा है कि मार्च 2023 से मई 2026 के बीच मेडिकल रिसर्च और मरीजों के इलाज के लिए आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए यूनिवर्सिटी को करीब 1,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे.

850 करोड़ की खरीद पर उठे सवाल

यूनिवर्सिटी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बीते तीन वर्षों में खरीदी गई लगभग 850 करोड़ रुपये की मशीनें जांच के दायरे में हैं. आरोप है कि उपकरणों की खरीद में निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों का पालन नहीं किया गया. ED ने इस मामले में संबंधित कंपनियों से दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जुटाने शुरू कर दिए हैं. जांच का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया और उसमें संभावित वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल करना है.

विजिलेंस पहले कर चुका है जांच

मशीनों की खरीद का मामला नया नहीं है. इससे पहले पंजाब विजिलेंस ब्यूरो भी कथित अनियमितताओं को लेकर जांच कर चुका है. हालांकि, उसकी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है. अब ED की जांच शुरू होने से मामले में वित्तीय लेनदेन और खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल और महत्वपूर्ण हो गई है. जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भी दबाव बढ़ा है.

100 से ज्यादा अधिकारियों की सैलरी रोकी

मशीन खरीद के साथ यूनिवर्सिटी में हुई नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में आ गई हैं. प्रशासन ने पिछले दो महीनों में नियुक्त किए गए 100 से अधिक अधिकारियों का वेतन फिलहाल रोक दिया है. बताया गया है कि इन कर्मचारियों की तनख्वाह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंजूरी के बाद ही जारी की जाएगी. इससे नियुक्तियों की प्रक्रिया और उनके आधार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

 AAP नेता ने की शिकायत

आम आदमी पार्टी के नेता अर्श सच्चर ने यूनिवर्सिटी में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें की हैं. उनका कहना है कि विजिलेंस और ED की जांच से पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है. वहीं, यूनिवर्सिटी के कार्यकारी वाइस चांसलर मनजीत सिंह बराड़ ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

जांच के नतीजे पर नजर

फिलहाल ED की जांच शुरुआती चरण में है. एजेंसी मशीनों की खरीद, संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जानकारी खंगाल रही है. वहीं, वेतन रोकने के फैसले से नियुक्तियों का मुद्दा भी चर्चा में है. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद और नियुक्तियों में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं.