कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अस्थायी कामगारों के लिए जारी किए जाने वाले परमिट अब सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी चर्चा में हैं. ग्लोबल न्यूज के अनुसार, कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी यानी सीबीएसए की एक वर्गीकृत खुफिया रिपोर्ट में ऐसे भारतीय नागरिकों का जिक्र किया गया है, जो पढ़ाई या काम के लिए कनाडा पहुंचे और बाद में आपराधिक गतिविधियों से जुड़े पाए गए.
रिपोर्ट में संगठित अपराध से जुड़े मामलों को लेकर विशेष चिंता जताई गई है. इसमें आशंका व्यक्त की गई है कि कुछ आपराधिक गिरोह वैध आव्रजन माध्यमों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कर सकते हैं.
रिपोर्ट में गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का उदाहरण भी सामने आया है. बराड़ वर्ष 2017 में थॉम्पसन रिवर्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए कनाडा पहुंचा था. हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों से यह साफ नहीं है कि उसने वास्तव में वहां नियमित रूप से पढ़ाई की थी या नहीं. बाद के वर्षों में उसका नाम कनाडा में बिश्नोई गिरोह के नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों और संगठित अपराध के गंभीर आरोपों में सामने आया. इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या अपराधी तत्व पढ़ाई या रोजगार के वैध रास्तों का इस्तेमाल अपने लिए कर रहे हैं.
सीबीएसए की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच स्टडी परमिट के जरिए कनाडा पहुंचे करीब 4,000 भारतीय नागरिकों पर कुल 17,929 आपराधिक मामलों में आरोप लगाए गए. वहीं 2024 में 2,418 भारतीय स्टडी परमिट धारकों पर 13,040 से ज्यादा आपराधिक आरोप लगाए जाने की बात कही गई है. हालांकि इन आंकड़ों को पूरे भारतीय छात्र समुदाय के संदर्भ में देखना जरूरी है. 2024 में कनाडा में करीब 1,88,125 भारतीय छात्र मौजूद थे. ऐसे में आरोपों का सामना करने वाले छात्रों की संख्या कुल भारतीय छात्र समुदाय के एक छोटे हिस्से के बराबर है. इसलिए कुछ लोगों की गतिविधियों के आधार पर पूरे भारतीय या पंजाबी समुदाय को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं होगा.
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कनाडा की आव्रजन जांच और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा है. यदि संगठित अपराध से जुड़े गिरोह स्टडी या वर्क परमिट जैसे वैध माध्यमों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क के विस्तार, युवाओं की भर्ती, जबरन वसूली या हिंसक गतिविधियों के लिए कर रहे हैं, तो यह कनाडा की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है. कनाडा पहले भारत पर विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े आरोप लगा चुका है, जबकि भारत इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है.