चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इकबाल सिंह संधू ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर संगठन से अपना नाता तोड़ लिया. संधू लंबे समय से अकाली दल की राजनीति का अहम चेहरा रहे हैं और तरनतारन क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है. उनके इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
इकबाल सिंह संधू वर्ष 1996 में पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह के माध्यम से शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए थे. वह मूल रूप से गांव मथरेवाल के रहने वाले हैं. प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान उन्हें एसएस बोर्ड का सदस्य बनाया गया था. बाद में उन्होंने जिले के युवा विंग की जिम्मेदारी भी संभाली.
अपने राजनीतिक जीवन के दौरान संधू को एक बार पार्टी से निष्कासित भी किया गया था. उस समय उन पर दिवंगत सांसद रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा के क्षेत्र में दखल देने का आरोप लगा था. हालांकि बाद में उनकी दोबारा पार्टी में वापसी हुई और सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव तथा वर्किंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया.
इकबाल सिंह संधू ने तरनतारन और खडूर साहिब विधानसभा क्षेत्रों से कई बार चुनाव लड़ने की इच्छा जताई. वर्ष 2025 में तरनतारन उपचुनाव के दौरान भी वह टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे. हालांकि पार्टी ने उम्मीदवार के तौर पर सुखविंदर कौर रंधावा को मैदान में उतारा. इसके बाद राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आए.
उपचुनाव के बाद जब कंचनप्रीत कौर रंधावा को हलका इंचार्ज बनाया गया तो संधू की राजनीतिक सक्रियता पहले की तुलना में कम होती चली गई. पार्टी कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी भी सीमित हो गई. इसी बीच उनके इस्तीफे की खबर सामने आने से राजनीतिक चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया.
सूत्रों के अनुसार इकबाल सिंह संधू आने वाले दिनों में किसी अन्य राजनीतिक दल का रुख कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं की राय लेने के बाद ही आगे का फैसला करेंगे. ऐसे में अब सभी की नजर उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है.