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राजा वड़िंग छोड़ेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान? राहुल-खड़गे की बैठक के बाद बढ़ी हलचल

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग इस्तीफा दे सकते हैं. अंतिम फैसला राहुल गांधी की बैठक के बाद होगा, जबकि चन्नी गुट अपनी बात हाईकमान तक पहुंचाने की तैयारी में है.

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राजा वड़िंग छोड़ेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान? राहुल-खड़गे की बैठक के बाद बढ़ी हलचल
Courtesy: Social Media

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है. दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक के बाद यह चर्चा तेज है कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पद छोड़ सकते हैं. हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. दूसरी ओर चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर कायम हैं. ऐसे में कांग्रेस के सामने संगठन और चुनावी संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है.

सूत्रों के अनुसार पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल की रिपोर्ट के बाद हाईकमान के सामने अलग-अलग दावों की तस्वीर उभरकर आई है. बताया जा रहा है कि जिला स्तर के कई पदाधिकारी राजा वड़िंग के समर्थन में हैं, जबकि बड़ी संख्या में मौजूदा और पूर्व विधायक तथा चुनाव लड़ चुके नेता चरणजीत सिंह चन्नी के साथ खड़े हैं. इसी वजह से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हुई हैं.

हाईकमान के सामने संतुलन की चुनौती

कांग्रेस नेतृत्व ऐसी स्थिति से बचना चाहता है जिसमें किसी एक गुट की नाराजगी बढ़ जाए. माना जा रहा है कि पार्टी राजा वड़िंग के संगठनात्मक काम को भी नजरअंदाज नहीं कर सकती और चन्नी समर्थकों की ताकत को भी अनदेखा करना आसान नहीं है. इसी कारण अंतिम फैसला काफी सोच-समझकर लेने की तैयारी है.

राजा वड़िंग के पक्ष में क्या तर्क हैं?

2022 विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद जब संगठन कमजोर स्थिति में था, तब राजा वड़िंग ने प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 7 सीटें जीतकर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. पार्टी के भीतर इसे उनके नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

चन्नी गुट क्यों बना हुआ है अहम?

चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों का दावा है कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक, सांसद और वरिष्ठ नेता जुड़े हैं. पार्टी को यह भी चिंता है कि यदि इस गुट की नाराजगी बढ़ी तो 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक पर असर पड़ सकता है. इसलिए कांग्रेस कोई ऐसा फैसला नहीं लेना चाहती जिससे संगठन में और दूरी पैदा हो.

अब राहुल गांधी के फैसले पर नजर

राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने के बाद हुई बैठकों ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है. माना जा रहा है कि वह जल्द ही असंतुष्ट नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर सकते हैं. इसके बाद ही यह साफ होगा कि राजा वड़िंग पद पर बने रहेंगे या संगठन में कोई नई जिम्मेदारी और नया नेतृत्व सामने आएगा. फिलहाल कांग्रेस ने किसी भी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.