नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और ईरान के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने इजरायल पर हमला किया तो इस बार जवाब पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर और ताकतवर होगा. दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष तथा परमाणु समझौते को लेकर भी स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आ रही है. ऐसे माहौल ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है.
नेगेव समिट के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को सीधे संदेश देते हुए कहा कि इजरायल हर परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि यदि ईरान किसी भी तरह का हमला करता है तो उसे यह नहीं मानना चाहिए कि प्रतिक्रिया पहले जैसी होगी. उनके अनुसार इस बार इजरायल की कार्रवाई अधिक मजबूत और व्यापक होगी. नेतन्याहू ने यह भी कहा कि अब वह दौर खत्म हो चुका है जब इजरायल केवल सीमित जवाब देता था. उन्होंने दोहराया कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और हर खतरे का जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा.
इजरायल के बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. दोनों देशों के बीच पहले हुआ युद्धविराम और समझौते की प्रक्रिया अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि पिछले महीने हुआ समझौता केवल एक परीक्षण था और ईरान उस पर खरा नहीं उतर सका. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका अपनी रणनीति को और सख्त बना सकता है. इससे क्षेत्र में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है और कई देशों की चिंता बढ़ गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले से ही हालात संवेदनशील बने हुए हैं. ऐसे में किसी भी नए सैन्य कदम से क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा सकता है. फिलहाल सभी की नजरें आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियों और संभावित सैन्य प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं. यदि तनाव कम नहीं हुआ तो इसका प्रभाव वैश्विक बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है.