भोपाल: मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला में आज एक ऐतिहासिक पल देखने को मिलने वाला है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज यानी बसंत पंचमी के मौके पर भोजशाला में एक साथ पूजा और नमाज पढ़ा जाएगा. इस खास पल पर सुरक्षा की भी तैयारी कर ली गगई है. 6000 से भी ज्यादा जवानों को चप्पे पर खड़ा किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि भोजशाला परिसर में शुक्रवार को मां सरस्वती की पूजा भी होगी और जुमे की नमाज भी अदा की जाएगी. कोर्ट ने नमाज पढ़ने के लिए 1 से 3 बजे तक का समय दिया है. वहीं सरस्वती पूजा के लिए कोई भी समय निर्धारित नहीं की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए यह साफ आदेश दिया कि भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होंगे. इसके लिए प्रशासन को अलग-अलग स्थान चिह्नित करने को कहा था. हालांकि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं और नमाज अदा करने वालों के लिए पास की व्यवस्था करने का आदेश दिया गया था. जिससे की भीड़ नियंत्रित हो और कानून व्यवस्था भी बनी रहे. इस बार सरस्वती पूजा शुक्रवार को है, इस दिन मुस्लिम समुदाय जुमें की नमाज अदा करते हैं. ऐसे में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में मदद मांगी. इसके लिए 2 जनवरी को याचिका दाखिल किया गया था. मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को दोनों समुदायों को पूजा और नमाज की इजाजत दी गई.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानते हुए भोजशाला के आसपास में सुरक्षा की सख्त तैयारी की गई है. प्रशासन की ओर से पहली बार सुरक्षा के लिए AI की भी मदद ली गई है. पूरे शहर में थ्री डी मैपिंग की गई है. जिसकी मदद से पुलिस कंट्रोल रूम से छतों, संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की लाइव निगरानी की जा सके. भोजशाला का इतिहास काफी प्राचीन है. जानकारी के मुताबिक हजारों साल पहले राजा भोज द्वारा भोजशाला का निर्माण किया गया था. हालांकि इसके बाद महमूद खिलजी ने इसे ढहाकर मकबरे के रूप में बदल दिया और फिर बाद में किए गए सर्वे में इसे हिंदू प्रतीक और संस्कृत शब्द मिले और इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया. कई सालों तक इसमें प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया और फिर दोनों समुदायों को इसमें पूजा और नमाज की अनुमति दी जाने लगी. लेकिन इस बार का संयोग काफी खास है.