नई दिल्ली: ट्रेन का सफर भारत में सबसे पसंदीदा और किफायती विकल्प है, लेकिन नियमों की जानकारी न होने से छोटी-छोटी बातों में बड़ी मुश्किल आ जाती है. नाम गलत होने पर क्या करें, कितनी टिकट बुक कर सकते हैं, रात में टीटीई टिकट चेक कर सकता है या नहीं-ऐसे कई सवाल यात्रियों के मन में घूमते रहते हैं. भारतीय रेलवे ने इन नियमों को यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया है, लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें नहीं जानते. यहां हम 8 ऐसे महत्वपूर्ण नियम बता रहे हैं जो आपके अगले सफर को सुगम बना सकते हैं और अनावश्यक परेशानी से बचा सकते हैं.
रिजर्व्ड टिकट पर नाम बदलना संभव है, लेकिन सिर्फ परिवार के सदस्यों के बीच. पिता, माता, भाई, बहन, बेटा, बेटी, पति या पत्नी को ट्रांसफर कर सकते हैं. इसके लिए 24 घंटे पहले लिखित अनुरोध और आईडी प्रूफ के साथ रिजर्वेशन ऑफिस जाना पड़ता है. चार्ट बनने के बाद यह नहीं हो पाता. गलत नाम सुधारने के लिए भी चार्ट से पहले ऑफलाइन आवेदन जरूरी है.
IRCTC अकाउंट अगर आधार से लिंक नहीं है तो एक महीने में सिर्फ 12 टिकट बुक हो सकती हैं. आधार लिंक करने पर यह संख्या बढ़कर 24 हो जाती है. यह नियम फर्जी बुकिंग रोकने के लिए है. तत्काल और प्रीमियम कोटा अलग गिने जाते हैं, इसलिए सामान्य बुकिंग में यह लिमिट लागू होती है.
तत्काल कोटा में एक PNR पर अधिकतम 4 पैसेंजर ही बुक कर सकते हैं. अब आधार ओटीपी वेरिफिकेशन भी जरूरी है. यह नियम एजेंटों की मनमानी रोकने और असली यात्रियों को मौका देने के लिए बनाया गया है. एक दिन में भी सीमित बुकिंग की अनुमति होती है.
कन्फर्म ई-टिकट की यात्रा तारीख बिना कैंसिलेशन चार्ज के बदली जा सकती है. सिर्फ किराए का अंतर देना पड़ता है, अगर नई तारीख का किराया ज्यादा हो. यह सुविधा यात्रा प्लान बदलने पर काफी राहत देती है, लेकिन सीट उपलब्धता पर निर्भर करती है.
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक टीटीई सामान्य रूप से टिकट नहीं चेक कर सकता, ताकि यात्री बिना डिस्टर्बेंस सो सकें. लेकिन अगर आपकी बोर्डिंग 10 बजे के बाद है तो चेकिंग हो सकती है. यह नियम स्लीपर और एसी कोच में लागू है.
मिडल बर्थ को सोने के लिए सिर्फ रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक खोला जा सकता है. दिन में इसे बंद रखना जरूरी है ताकि लोअर बर्थ पर सभी यात्री बैठ सकें. यह एटिकेट नियम सहयात्रियों के बीच समझदारी बनाए रखता है.
अगर आप बोर्डिंग स्टेशन पर नहीं पहुंचते तो टीटीई अब अगले स्टेशन तक इंतजार नहीं करता. वह तुरंत टैबलेट पर एबसेंट मार्क कर सीट वेटिंग या RAC वाले को अलॉट कर देता है. इसलिए समय पर पहुंचना जरूरी है.
ट्रेन डिपार्चर से 24 घंटे पहले तक ऑनलाइन बोर्डिंग पॉइंट बदल सकते हैं. चार्ट बनने के बाद यह संभव नहीं. करंट अवेलेबल टिकट में भी बदलाव नहीं होता. नया स्टेशन मूल के बाद का ही चुनें.