भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. राज्य सरकार इसे लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. इसी कड़ी में अब सरकार ने लक्ष्य रखा है कि दिवाली तक इसका मसौदा तैयार कर लिया जाए. यह कदम भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से घोषित 'एक राष्ट्र, एक कानून' के एजेंडे को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागरिक संहिता को लागू करने का पूरा मन बना लिया है. जिसके लिए उन्होंने गृह विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे उत्तराखंड और गुजरात में लागू यूसीसी कानूनों का अध्ययन करें और अगले छह महीनों के अंदर एक ड्राफ्ट बिल तैयार करें. इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, अधिकारी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने यूसीसी के समर्थन में कहा कि देश के हर नागरिक के लिए समान कानून होना जरूरी है. उनके अनुसार, इससे सभी को बराबरी के अधिकार मिलेंगे और देश की एकता व अखंडता मजबूत होगी.
वहीं, विपक्ष अब सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रहा है साथ ही कानून लागू करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर ने कहा कि सरकार को कानून बनाने से पहले सभी वर्गों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए और लोगों को विश्वास में लेना चाहिए ताकि बाद में कोई विवाद की स्थिति न बने.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तराखंड ने पहले 2025 में ये कानून लागू किया था, जिसमें शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया.
इसके बाद गुजरात ने 2026 में इसे अपनाते हुए उत्तराधिकार में बेटा-बेटी को समान अधिकार देने और एक से ज्यादा शादी को अपराध घोषित करने जैसे प्रावधान शामिल किए. बता दें भाजपा का मनना है कि यूसीसी से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और देश में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित होगा.