भोपाल: ईरान में चल रहे युद्ध ने वैश्विक तेल और ऊर्जा की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिसका भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादन लागत पर गहरा असर पड़ा है. होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई में रुकावटों ने ईंधन और पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की लागत बढ़ा दी है, जिससे औद्योगिक कामकाज पर दबाव बढ़ गया है.
भोपाल के पास एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र मंडीदीप में पेट्रोकेमिकल कच्चे माल पर निर्भर इकाइयां मुश्किल में हैं क्योंकि बढ़ती लागत और सप्लाई में देरी के कारण उन्हें उत्पादन कम करना पड़ रहा है, शिफ्ट घटानी पड़ रही हैं और मजदूरी कम करनी पड़ रही है.
सोमवार सुबह औद्योगिक क्षेत्र का दौरा करने पर साफ तौर पर मंदी दिखाई दी. जो फैक्ट्रियां कभी तीन शिफ्ट में चलती थीं, वे अब कम क्षमता पर चल रही हैं. गेट पर कम ट्रक दिखाई दे रहे हैं और कई इकाइयों में मशीनें आधी गति से चल रही हैं. कुल उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो कच्चे माल की बढ़ती लागत और लॉजिस्टिक्स यानी परिवहन में रुकावटों के लगातार बढ़ते असर को दिखाता है.
यह मंदी मंडीदीप के 'मजदूर चौक' पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है, जहां रोज़ाना मजदूरी की तलाश में आने वाले मजदूरों की संख्या अचानक बढ़ गई है. कई मजदूरों को या तो नौकरी से निकाल दिया गया है या फिर मजदूरी में कटौती के कारण उन्होंने खुद ही नौकरी छोड़ दी है.
विदिशा के रहने वाले और पिछले लगभग आठ सालों से मंडीदीप में काम कर रहे प्रवासी मजदूर भूरा जाटव ने बताया कि उन्होंने एक प्लास्टिक फैक्ट्री में अपनी नौकरी तब छोड़ दी, जब उनकी रोजाना की मजदूरी 600-700 रुपये से घटाकर 450 रुपये कर दी गई.
कच्चे माल की सप्लाई कम होने के कारण फैक्ट्रियों ने अपना कामकाज घटाकर एक ही शिफ्ट तक सीमित कर दिया है, जिससे मजदूर काम की तलाश में भटक रहे हैं और अक्सर उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है. इस संकट के कारण कई मजदूरों को अपने गांव लौटना पड़ रहा है.
फैक्ट्रियों के अंदर भी हालात उतने ही गंभीर हैं. पेन बनाने और उनकी पैकेजिंग करने वाली एक फैक्ट्री में कर्मचारियों की संख्या घटाकर आधी कर दी गई है.
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह रुकावट सिर्फ स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग तक ही सीमित नहीं है. मंडीदीप के 'एसोसिएशन ऑफ़ ऑल इंडस्ट्रीज' के महासचिव नीरज जैन ने कहा कि शिपमेंट में देरी और पेट्रोकेमिकल उत्पादन में कमी ने लगभग आधे घरेलू बाजार को प्रभावित किया है. एक्सपोर्ट में भी भारी गिरावट आई है. मासिक कंटेनर वॉल्यूम 3,500 से घटकर लगभग 1,500 रह गया है और पिछले एक महीने से खाड़ी देशों को होने वाला शिपमेंट लगभग पूरी तरह से रुका हुआ है.