भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब इंदौर की जल त्रासदी को लेकर विवादों में घिरे कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अचानक भोपाल पहुंचे. बीजेपी दफ्तर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के साथ खुले मैदान में हुई गोपनीय मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए. क्या यह सिर्फ एक नियमित बैठक थी या फिर दिल्ली से आया कोई सख्त संदेश, इसे लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं.
गुरुवार को कैलाश विजयवर्गीय का इंदौर छोड़कर अचानक भोपाल पहुंचना अपने आप में चौंकाने वाला रहा. ऐसे समय में जब इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला राजनीतिक तूल पकड़ चुका है, उनका यह दौरा सामान्य नहीं माना जा रहा. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह दौरा पहले से सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं था, जिससे अटकलें और तेज हो गईं.
बीजेपी कार्यालय में जिस तरह की सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली, वह पहले कभी नहीं देखी गई. विजयवर्गीय के चारों ओर कड़ा सुरक्षा घेरा था. बातचीत के दौरान सुरक्षाकर्मियों के अलावा किसी को भी मैदान में रहने की अनुमति नहीं दी गई. यहां तक कि पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया भी दूर रखे गए, जिससे मुलाकात की गंभीरता पर सवाल खड़े हुए.
कैलाश विजयवर्गीय और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के बीच बातचीत कार्यालय के खुले मैदान में हुई. यह असामान्य इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर ऐसी बैठकें बंद कमरों में होती हैं. चर्चा का विषय सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन बातचीत की गोपनीयता और सुरक्षा इंतजामों ने इसे बेहद अहम बना दिया.
इंदौर जल संकट पर दिए गए बयानों के बाद पार्टी पहले ही नेताओं को संयम बरतने की हिदायत दे चुकी है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली आलाकमान ने संगठन महामंत्री के जरिए विजयवर्गीय को कोई सख्त संदेश दिया है. राजनीतिक जानकार इसे डैमेज कंट्रोल या भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं.
आधिकारिक तौर पर पार्टी ने इसे दिसंबर से शुरू हुई मंत्रियों की नियमित बैठक का हिस्सा बताया है. हालांकि, समय, परिस्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इस दलील पर सभी सहमत नहीं दिखते. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह मुलाकात केवल औपचारिक थी या बीजेपी के भीतर किसी बड़े फैसले का संकेत.