भागीरथपुरा: इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इन दिनों दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर चर्चा में है. इस घटना ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी बीच एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में भागीरथपुरा के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला को बेस्ट पार्षद का अवॉर्ड देते हुए देखा जा सकता है.
यह वीडियो करीब सात से आठ महीने पुराना बताया जा रहा है. वीडियो में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव एक सार्वजनिक मंच से पार्षद कमल वाघेला की तारीफ करते नजर आते हैं. महापौर उन्हें बेस्ट पार्षद का अवॉर्ड और अच्छा काम करने का सर्टिफिकेट सौंपते हैं. इस दौरान मंच से उनके विकास कार्यों का खुलकर जिक्र किया गया.
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव भागीरथपुरा के पार्षद को ₹10 करोड़ के ड्रेनेज और सड़क के काम के लिए बेस्ट पार्षद का अवार्ड दिया था।
— काश/if Kakvi (@KashifKakvi) January 6, 2026
बधाई।
₹10 करोड़ का बंदर बाँट किस किस को हुआ? #IndoreWaterCrisispic.twitter.com/NIPrBIvd8n
वीडियो में महापौर कहते सुनाई देते हैं कि कमल वाघेला ने अपने वार्ड में 24 सड़कों का निर्माण करवाया है. उन्होंने बताया कि पहले ड्रेनेज लाइन डाली गई, फिर पानी की लाइन डाली गई और उसके बाद सड़कें बनाई गईं. महापौर के अनुसार एक सड़क पर करीब 10 लाख रुपये खर्च हुए और इस तरह कुल काम करीब 2 करोड़ 40 लाख रुपये का हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि एक पार्षद ने तीन साल में करीब 10 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवा दिए.
महापौर ने मंच से यह भी कहा कि वह सभी पार्षदों से अपील करते हैं कि वे भागीरथपुरा आकर देखें कि वहां कैसे काम हुआ है. उन्होंने कहा कि कमल वाघेला लगातार काम के लिए फॉलो करते रहते हैं और उन्होंने आज तक उनका कोई काम नहीं रोका. इसके बाद उन्हें अच्छा काम करने का सर्टिफिकेट देकर बधाई दी गई.
अब यही भागीरथपुरा इलाका दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सुर्खियों में है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवेज और पानी की पाइपलाइन में लीकेज की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं. लोगों का कहना है कि इसके बावजूद न तो पार्षद ने और न ही प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से लिया.
इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद महापौर के हालिया बयानों पर भी सवाल उठ रहे हैं. मौतों के बाद महापौर ने कहा था कि अफसर उनकी बात नहीं सुनते. लेकिन अब लोग पूछ रहे हैं कि जब मंच से विकास और काम का सर्टिफिकेट दिया जा रहा था, तब जमीनी हालात क्या थे.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कागजों में ड्रेनेज और पानी की लाइन पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके थे, तो फिर दूषित पानी लोगों तक कैसे पहुंचा. अगर काम सही तरीके से हुआ था, तो सीवेज पानी सप्लाई में कैसे मिला.