इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैल रही डायरिया की समस्या तेजी से बढ़ रही है. स्वास्थ्य विभाग ने 9,416 लोगों की जांच की है, इनमें 20 नए मरीज पाए गए हैं. अब तक 142 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 11 आईसीयू में हैं. छह मौतें आधिकारिक रूप से दर्ज की गई हैं. इस संकट के बीच कांग्रेस ने राज्यव्यापी विरोध और वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग उठाई है.
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैल रही डायरिया ने 142 लोगों को अस्पताल में भर्ती करा दिया है. स्वास्थ्य विभाग ने 2,354 घरों में सर्वे किया और 20 नए मरीज पाए. अब तक 398 मरीज इलाज के लिए अस्पताल आए, जिनमें 256 ठीक होकर घर लौट चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता जारी है.
कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शन्स की टीम इंदौर पहुंची. विशेषज्ञ स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं ताकि बीमारी फैलने से रोकी जा सके. उन्होंने पानी की गुणवत्ता, पाइपलाइन स्थिति और संक्रमण रोकने के उपायों की समीक्षा शुरू कर दी है.
अब तक छह मौतें दर्ज हैं, लेकिन स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि 16 लोग, जिसमें छह महीने का बच्चा भी शामिल है, मरे हैं. कांग्रेस ने बेल बजाकर विरोध जताया और मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की. विजयवर्गीय के 'घंटा' वाले बयान ने विवाद और बढ़ा दिया है.
कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जितु पतवारी ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो 11 जनवरी को आंदोलन होगा. उन्होंने कहा कि जनता की मौतें सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा हैं.
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने इसे 'सिस्टम-निर्मित आपदा' बताया. उन्होंने कहा कि पुराने और गंदे इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण सीवेज पानी में मिलकर संक्रमण फैला. इंदौर जैसे साफ-सुथरे शहर में यह स्थिति चिंताजनक है. जमीन के जल स्तर में गिरावट और भ्रष्टाचार ने समस्या को और जटिल बना दिया है.