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India Daily

धार: 'मंदिरों के हिस्सों का इस्तेमाल करके बनाई गई थी कमाल मौला मस्जिद...' भोजशाला पर ASI की बड़ी रिपोर्ट; जानें कब होगी अगली सुनवाई

ASI रिपोर्ट में दावा किया गया है कि धार के भोजशाला में कमाल मौला मस्जिद के निर्माण में प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया था. इंदौर बेंच ने सभी पक्षों से दो हफ्ते के अंदर अपनी आपत्तियां दर्ज करने को कहा है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
धार: 'मंदिरों के हिस्सों का इस्तेमाल करके बनाई गई थी कमाल मौला मस्जिद...' भोजशाला पर ASI की बड़ी रिपोर्ट; जानें कब होगी अगली सुनवाई
Courtesy: @tishasaroyan x account

इंदौर: आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने यह नतीजा निकाला है कि MP के धार में भोजशाला कॉम्प्लेक्स में कमाल मौला मस्जिद पुराने मंदिरों के हिस्सों का इस्तेमाल करके बनाई गई थी. साइंटिफिक जांच, सर्वे और खुदाई, मिली चीजों की स्टडी और एनालिसिस, आर्किटेक्चरल अवशेषों, शिलालेखों, कला और मूर्तियों की स्टडी के आधार पर 2024 में MP HC की इंदौर बेंच को सौंपी गई.

ASI रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्ट्रक्चर सदियों बाद सिमिट्री, डिजाइन या यूनिफॉर्मिटी पर ज्यादा ध्यान दिए बिना बनाया गया था. सोमवार को बेंच ने भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद पर याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि ASI रिपोर्ट सभी पार्टियों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए. 

कब होगी अगली सुनवाई?

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने सभी पार्टियों को दो हफ्ते में आपत्तियां, सुझाव, राय और सुझाव दाखिल करने का निर्देश दिया, अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है.

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के राज्य उपाध्यक्ष आशीष गोयल, जो एक याचिकाकर्ता भी हैं, उन्होंने कहा, 'ASI की सर्वे रिपोर्ट जो सामने आई है उससे पता चलता है कि पूरा ढांचा परमार वंश का है. इसे राजा भोज और उनके पूर्वजों ने बनवाया था. यह ढांचा लगभग 950 से 1,000 साल पुराना है.' गोयल ने कहा, 'यह रिपोर्ट हिंदू समुदाय के लिए बहुत हिम्मत देने वाली है. बहुत जल्द, यह निर्णायक लड़ाई नतीजे पर पहुंचेगी.'

उन्होंने आगे क्या कहा?

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि रिपोर्ट अभी खोली गई है या पहले. फर्क इस बात से पड़ता है कि भोजशाला का धार्मिक चरित्र क्या होगा. उन्होंने कहा, 'यह वह मुद्दा है जिस पर हिंदू समुदाय सालों से संघर्ष कर रहा है.' 

एक और पिटीशनर, भोज उत्सव समिति के कन्वीनर अशोक जैन ने कहा, 'हमने यह सोचकर पिटीशन फाइल की थी कि अगर वह जगह मस्जिद थी, तो उन्हें मुसलमानों को दे दी जानी चाहिए और अगर वह मंदिर है तो वह हमें मिलनी चाहिए. 

अगली सुनवाई को लेकर क्या बताया?

अब कोर्ट ने सभी को जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. हम अगली सुनवाई के बाद जरूरी कदम उठाएंगे. जैन ने कहा, 'रिपोर्ट से पता चलता है कि बाद में जो स्ट्रक्चर बनाए गए, उनमें उस समय की असली भोजशाला को तोड़कर इस्तेमाल किया गया था.'

10 वॉल्यूम में 2,000 पेज की यह रिपोर्ट ASI के एडिशनल डायरेक्टर जनरल आलोक त्रिपाठी ने तैयार की थी, जिसमें ज़ुल्फिकार अली, भुवन विक्रम, गौतमी भट्टाचार्य, मनोज कुमार कुर्मी, इजहार आलम हाशमी, आफताब हुसैन, शंभू नाथ यादव और नीरज कुमार मिश्रा का योगदान था.

ASI को क्या मिले?

टीम ने 98 दिन के सर्वे के दौरान खुदाई, स्टडी और नतीजों को लिस्ट करने के लिए लेटेस्ट साइंटिफिक टेक्नीक का इस्तेमाल किया और इशारा किया कि यह देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर हो सकता है. ASI को कुल 94 मूर्तियां और मूर्तियों के टुकड़े मिले, जिनमें से कई छेनी से खोदी हुई थीं या खराब हो गई थीं. मौजूदा स्ट्रक्चर में इस्तेमाल की गई खिड़कियों, खंभों और बीम पर चार भुजाओं वाले देवताओं की मूर्तियां बनाई गई थीं.