मध्य प्रदेश में अफसरों की संपत्ति को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने पूरे देश में हलचल मचा दी है. भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित गुराड़ी घाट गांव में एक ही दिन 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने कृषि भूमि खरीदे ली. खास बात यह है कि जमीन खरीदने के कुछ महीनों बाद ही वहां 3200 करोड़ रुपए के वेस्टर्न बायपास को मंजूरी मिल गई और फिर 10 महीने में जमीन का लैंड यूज भी बदल दिया गया. इसके बाद जमीन की कीमत में भारी उछाल आया.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 4 अप्रैल 2022 को 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में की गई. इस जमीन को 50 हिस्सों में बांटकर खरीदा गया था. दस्तावेजों में इसकी कीमत करीब 5.5 करोड़ रुपए दर्ज की गई. वहीं बाजार मूल्य इससे अधिक बताया गया. संपत्ति विवरण में इसे like-minded officers द्वारा किया गया निवेश बताया गया है. हालांकि, दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि 50 हिस्सों के पीछे वास्तविक खरीदारों की संख्या 41 थी.
जमीन खरीद के लगभग 16 महीने बाद राज्य कैबिनेट ने 3200 करोड़ रुपए के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दी. प्रस्तावित बायपास का मार्ग खरीदी गई जमीन से करीब 500 मीटर की दूरी पर बताया गया है. इसके बाद जून 2024 में जमीन का लैंड यूज कृषि से बदलकर आवासीय कर दिया गया. यही वह मोड़ था, जहां से जमीन की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला. पहले जिस जमीन की कीमत सामान्य कृषि भूमि के हिसाब से तय थी. वह अचानक रियल एस्टेट निवेश का बड़ा केंद्र बन गई.
यह जमीन खरीदी गई थी, तब इसकी कीमत करीब 81 रुपए प्रति वर्गफीट के आसपास बताई गई. लैंड यूज बदलने के बाद इसकी दर बढ़कर लगभग 557 रुपए प्रति वर्गफीट पहुंच गई. वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से यह कीमत अब 2500 से 3000 रुपए प्रति वर्गफीट तक बताई जा रही है. अनुमान है कि कुल जमीन का मूल्य अब 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच पहुंच चुका है.