कर्नाटक में वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के शुरुआती दो स्टैंजा गाने के राज्य सरकार के फैसले का गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बचाव किया है. इसी बीच उन्होंने बीजेपी नेताओं बीवाई विजयेंद्र और आर अशोक को खुली चुनौती दी.
कलबुर्गी में एक कार्यक्रम के दौरान प्रियांक खरगे ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर अशोक का नाम लेते हुए यह चुनौती दी कि दोनों नेता सार्वजनिक कार्यक्रम में बिना किसी लिखित सामग्री या टेलीप्रॉम्प्टर की मदद के वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाकर दिखाएं. खरगे ने कहा कि अगर वे ऐसा कर पाते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे.
कर्नाटक सरकार ने हाल में राज्य के ज्यादातर सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो स्टैंजा गाने का निर्देश दिया है. हालांकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के लिए अलग प्रावधान रखा गया है. बीजेपी ने इस फैसले का विरोध किया है और राष्ट्रीय गीत के पूरे आधिकारिक संस्करण के गायन की मांग की है.
कांग्रेस ने अगस्त में 1937 के अपने प्रस्ताव का हवाला देते हुए पार्टी कार्यक्रमों में शुरुआती दो स्टैंजा गाने की स्थिति दोहराई थी. प्रियांक खरगे ने भी इसी ऐतिहासिक रुख का बचाव किया है.
इस विवाद के बीच केंद्र सरकार के जनवरी 2026 के निर्देशों का भी जिक्र हो रहा है. गृह मंत्रालय ने ऐसे निर्धारित आधिकारिक अवसरों के लिए वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के इस्तेमाल से जुड़ी गाइडलाइन जारी की थी, खासकर जब इसे राष्ट्रगान जन गण मन के साथ बजाया जाए. यही वजह है कि कर्नाटक सरकार के दो स्टैंजा वाले आदेश को लेकर राजनीतिक विवाद के साथ कानूनी सवाल भी खड़े हो गए हैं.
15 सितंबर को वकील गिरीश भारद्वाज ने कर्नाटक हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी. याचिका में दावा किया गया है कि 8 सितंबर के राज्य सरकार के आदेश और केंद्र की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बीच विरोधाभास है. याचिकाकर्ता ने राज्य के आदेश को रद्द करने की मांग की है.