बेंगलुरु: मध्य प्रदेश की अजनार नदी की सफाई से चर्चा में आए सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें लोग बिट्टू तबाही के नाम से जानते हैं, अब बेंगलुरु पहुंचे हैं. शनिवार को उन्होंने स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों के साथ तुराहल्ली जंगल में सफाई अभियान चलाया. करीब चार घंटे चले इस अभियान में दो टन से अधिक कचरा हटाया गया. सफाई के दौरान प्लास्टिक के अलावा पोल्ट्री कचरा, मेडिकल कचरा, सैनिटरी सामान और कुत्तों के शव भी मिले, जिसे देखकर अभियान में शामिल लोग हैरान रह गए.
बिट्टू तबाही शनिवार सुबह बनशंकरी छठवें स्टेज से शुरू हुए ‘क्लीन अप तुराहल्ली’ अभियान का हिस्सा बने. उनके साथ पर्यावरणविद् एएन येल्लप्पा रेड्डी और इंडिया प्लॉग रन के रामकृष्ण गणेशन भी मौजूद रहे. अभियान सुबह आठ बजे शुरू हुआ. कचरे के बड़े ढेर हटाने के लिए बैकहो मशीन की मदद भी लेनी पड़ी.
बिट्टू ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि जंगल में मुख्य रूप से प्लास्टिक का कचरा होगा. लेकिन सफाई शुरू करने पर स्थिति उम्मीद से कहीं ज्यादा गंभीर मिली. प्लास्टिक के ढेर के नीचे मेडिकल और अन्य तरह का कचरा मिला. कुछ स्थानों पर कुत्तों के शव भी पड़े थे. उन्होंने इसे आसपास की सफाई के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी से जोड़ा.
बिट्टू ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि देश की टेक राजधानी के हरित क्षेत्र साफ-सुथरे होंगे. लेकिन तुराहल्ली में सड़क के आसपास भी लंबे समय से पड़ा कचरा दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि पूरी जगह को हाथ से साफ करना संभव नहीं हो पाया और बड़े ढेर हटाने के लिए मशीन बुलानी पड़ी. उन्होंने पेड़ों और जंगलों के प्रति लोगों की उदासीनता पर भी सवाल उठाया.
इस अभियान की शुरुआत करने वाले एएन येल्लप्पा रेड्डी ने बिट्टू तबाही के प्रयास की सराहना की. उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा उनके काम से प्रेरणा लेकर प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण को गंभीरता से लेंगे. रेड्डी ने यह भी बताया कि करीब चार दशक पहले तुराहल्ली क्षेत्र चार बड़े जलाशयों के लिए जलसंचयन क्षेत्र हुआ करता था.
बिट्टू तबाही का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है और वह मध्य प्रदेश के छात्र हैं. इस साल 26 जनवरी से उन्होंने अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था. वह कई बार अकेले भी नदी में उतरकर कचरा निकालते हैं. इंस्टाग्राम पर उनके 17 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वह अपने और दोस्तों के सफाई अभियानों के वीडियो साझा करते रहते हैं, जिससे उन्हें देश-विदेश में पहचान मिली है.