नई दिल्ली: कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सत्ता संघर्ष एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर नजर आया. बेंगलुरु में आयोजित पार्टी की एक अहम रैली के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया उस वक्त नाराज हो गए, जब युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए. यह घटना उस समय हुई, जब पार्टी केंद्र सरकार की एक योजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी और मंच पर शीर्ष नेता मौजूद थे.
मंगलवार को बेंगलुरु में कांग्रेस की रैली के दौरान माहौल अचानक असहज हो गया. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जैसे ही मंच से बोलने के लिए खड़े हुए, युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता जोर-जोर से “डीके, डीके” के नारे लगाने लगे. नारे इतने तेज हो गए कि मंच पर बैठे नेता भी चौंक गए. यह रैली मूल रूप से केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आयोजित की गई थी, लेकिन ध्यान पार्टी की अंदरूनी राजनीति पर चला गया.
नारेबाजी से स्पष्ट रूप से नाराज सिद्धारमैया ने मंच से ही कार्यकर्ताओं को चुप रहने के लिए कहा. उन्होंने आसपास बैठे कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि नारे लगाने वाले कौन हैं. इस दौरान डीके शिवकुमार भी मंच पर मौजूद थे. दिलचस्प बात यह रही कि मंच पर दोनों नेताओं के बीच सामान्य बातचीत और सौहार्द का माहौल दिखा, लेकिन नीचे से उठे नारों ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया.
Power struggle playing out at Congress protest in Bengaluru?
— Deepak Bopanna (@dpkBopanna) January 27, 2026
Chants of DK Shivakumar echo moments before Chief Minister Siddaramaiah's speech. A visibly irked CM asks the crowd to keep quiet and sit down. pic.twitter.com/Y7upqQ0LaL
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने इन वीडियो को साझा करते हुए तीखी टिप्पणी की. उन्होंने लिखा कि बेंगलुरु में कांग्रेस का मंच एक बार फिर कुर्सी की लड़ाई का अखाड़ा बन गया. उनके अनुसार यह जन आंदोलन नहीं बल्कि सत्ता की खींचतान है, जिसमें जनता और विकास पीछे छूट गए हैं.
बेंगलुरु में कांग्रेस का मंच एक बार फिर कुर्सी की जंग का अखाड़ा बन गया।
— Rohan Gupta (@rohanrgupta) January 27, 2026
मुख्यमंत्री के भाषण से पहले डीके शिवकुमार के नारे गूंजे और सिद्धारमैया को माइक से भीड़ को चुप कराना पड़ा।यह जनआंदोलन नहीं, कांग्रेस के भीतर सत्ता की लड़ाई है—जहाँ न जनता मायने रखती है, न विकास। आपसी टकराव के… pic.twitter.com/Xxw58v0fgw
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संतुलन को लेकर चर्चा चलती रही है. कई विधायक और विधान परिषद सदस्य उपमुख्यमंत्री के समर्थन में खुलकर सामने आ चुके हैं. दावा किया जाता है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए आधे कार्यकाल का आश्वासन दिया गया था, जिसकी शुरुआत नवंबर से मानी जा रही थी.
पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं के बीच तनाव कम करने के लिए संयुक्त बैठकों का सहारा लिया है. नाश्ते और भोजन पर बैठकें कराकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश हुई. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे हाईकमान के फैसले को मानेंगे. मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे.