बेंगलुरु: बेंगलुरु, जिसे कभी अपनी हरियाली और बेहतरीन मौसम के लिए जाना जाता था, आज अपने ही निवासियों की आलोचना का केंद्र बना हुआ है. हाल ही में आदित्य कुलकर्णी नामक एक निवासी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर शहर की दुर्दशा का एक स्याह चित्र खींचा है. आदित्य, जो दो साल बाद शहर वापस लौटे हैं, का कहना है कि उनके प्रवास के दौरान शहर बेहतरी के बजाय बर्बादी की ओर बढ़ा है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मुझे लौटे 3 महीने हो चुके हैं और शहर को पहचान पाना अब मुश्किल है.'
आदित्य ने शहर की प्रमुख समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा कि हर जगह निर्माण कार्य चल रहा है, सड़कें या तो खुदी हुई हैं या फिर गहरे गड्ढों से भरी हैं. उन्होंने कचरे के अंबार और उससे उठने वाली दुर्गंध पर भी गहरी चिंता जताई. उनके अनुसार, ट्रैफिक की समस्या पहले से कहीं अधिक विकराल हो गई है और सड़कों पर लोगों में नागरिक भावना (civic sense) का भारी अभाव दिख रहा है.
It’s been more than 3 months since I moved back to Bangalore and I must say that the city has changed significantly in the 2 years I was away. The change has been for the worse, I’m afraid. There’s construction everywhere, roads are either dug up or full of potholes. There’s…
— Aditya Kulkarni (@adikulk) April 6, 2026Also Read
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इस पोस्ट के वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स दो गुटों में बंट गए. कई लोगों ने आदित्य की बातों का समर्थन करते हुए अपनी आपबीती साझा की. एक यूजर ने लिखा, 'सड़कों का कोई रखरखाव नहीं है, बारिश के बाद धूल कीचड़ में तब्दील हो जाती है.' वहीं, एक अन्य नाराज यूजर ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 'अगर बुनियादी सड़क और कचरा प्रबंधन भी नहीं हो सकता, तो आईटी कंपनियां जल्द ही बेंगलुरु का विकल्प ढूंढना शुरू कर देंगी.'
हालांकि, आलोचनाओं के बीच कुछ लोगों ने बेंगलुरु के प्रति अपना प्रेम भी जताया. 16 वर्षों से शहर में रह रहे एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, 'बेशक यहां बुनियादी ढांचे की समस्याएं हैं, लेकिन बेंगलुरु का जीवंत माहौल और यहां की वाइब इन समस्याओं पर भारी पड़ती है.' कुछ अन्य लोगों का मानना था कि बेंगलुरु आज भी देश के अधिकांश शहरों से बेहतर है, बस बढ़ते पलायन के कारण बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ गया है जिसे सुलझाने की जरूरत है.