रांची: राजधानी रांची में गंभीर जल संकट गहरा गया है. शहर के कई इलाकों में करीब तीन लाख से अधिक लोगों को पिछले चार दिनों यानी 96 घंटों से नल का पानी नहीं मिल पा रहा है. रातू सिमलिया, इटकी रोड, पंडरा रोड, पुंदाग, अरगोड़ा, हाउसिंग कॉलोनी, जगन्नाथपुर और मौसीबाड़ी सहित कई बस्तियों के निवासी सबसे ज्यादा परेशान हैं.
लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए बाजार से बोतलबंद पानी और जार खरीदने को मजबूर हो गए हैं. इसके बावजूद रसोई का काम, नहाना और अन्य घरेलू जरूरतें प्रभावित हो रही हैं. कई कॉलोनियों में इमारतों की ऊपरी टंकियां पूरी तरह खाली पड़ी हैं. जहां वैकल्पिक पानी के स्रोत नहीं हैं, वहां स्थिति और खराब है. मलिन बस्तियों के लोग मिनी हैड और नगर निगम के चापानलों पर लंबी कतारें लगाए दिख रहे हैं.
समस्या की मुख्य वजह रुक्का जलशोधन केंद्र से जुड़े अंडरग्राउंड रेजरवायर (यूजीआर) एक और दो से पानी की सप्लाई बंद होना है. जगन्नाथपुर संप से भी चार दिन से पानी नहीं आ रहा. इस दस लाख गैलन क्षमता वाले संप से रोज करीब आठ लाख गैलन पानी लाइट हाउस, मौसीबाड़ी और आसपास की दर्जनों बस्तियों में जाता था. सिमलिया संप से पुंदाग जलमीनार और हरमू हाउसिंग कॉलोनी की टंकी के जरिए लगभग डेढ़ लाख लोगों को पानी मिलता था.
सबसे बड़ी तकनीकी समस्या आईटीबीपी के पास यूजीआर एक में लगे बूस्टर मोटर पंप का पावर ट्रांसफार्मर खराब होना है. यह चार हजार केवी क्षमता का ट्रांसफार्मर खराब हो गया है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की मैकेनिकल शाखा के पास कोई स्टैंडबाय ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं है. कर्मचारियों ने पिछले तीन दिनों से अपनी तरफ से मरम्मत की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. नतीजतन देर रात तक भी बड़े इलाकों में पानी नहीं पहुंच सका.
इस संकट ने आम लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित की है. अधिकारी स्तर पर जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल प्रभावित इलाकों के निवासी पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं. प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि सामान्य जलापूर्ति जल्द बहाल हो सके.