झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार को मतदान हो रहा है. इन सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सह-संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट पर भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है.
राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ महागठबंधन और विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन दोनों ने अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार कर ली हैं. मतदान के नतीजे यह तय करेंगे कि राज्य की राजनीतिक तस्वीर उच्च सदन में किस रूप में दिखाई देगी.
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है. ऐसे में सभी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने और वोटों के बंटवारे को रोकने के प्रयास में जुटे हुए हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संख्या बल के लिहाज से महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई देती है, लेकिन राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग की संभावना को कभी भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के दो विधायक शामिल हैं. वहीं एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं. इनमें भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और जनता दल (यूनाइटेड) के एक-एक विधायक गठबंधन का हिस्सा हैं. इसके अलावा झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक विधानसभा में मौजूद है.
संख्या बल महागठबंधन के पक्ष में होने के बावजूद चुनावी मुकाबला तब रोचक हो गया, जब निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी मैदान में उतरे. नथवानी को भाजपा का समर्थन प्राप्त है और उनकी रणनीति संभावित क्रॉस-वोटिंग पर आधारित मानी जा रही है. राजनीतिक गलियारों में नथवानी का नाम नया नहीं है. वह तीन बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में चुनाव जीतने का अनुभव रखते हैं. वर्ष 2008 में वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे. इसके बाद 2014 में भाजपा और आजसू के समर्थन से दोबारा उच्च सदन के सदस्य बने. वर्ष 2020 में उन्होंने आंध्र प्रदेश से राज्यसभा का चुनाव जीतकर अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया.