अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर नया मोड़ सामने आया है. जिनेवा में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षरों से पहले ही दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया. इसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि 19 जून को प्रस्तावित बैठक में आखिर क्या होगा?
दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होने थे, लेकिन उससे पहले ही एमओयू पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर किए गए.
प्रारंभिक योजना के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होने थे. हालांकि मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच समय से पहले सहमति बनाने पर चर्चा हुई थी. रिपोर्टों के अनुसार इसका एक प्रमुख कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द से जल्द खोलने की आवश्यकता थी. माना जा रहा है कि समझौते की अधिकांश शर्तों पर दोनों पक्ष पहले ही सहमत हो चुके थे और केवल औपचारिक प्रक्रिया बाकी थी. ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के जरिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया.
समझौते की प्रक्रिया को लेकर कई तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों देशों ने सहमति के तहत अपने-अपने राष्ट्रपतियों से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए. राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक कार्यक्रम के दौरान दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ट्रंप, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर गालीबाफ पहले ही रविवार को इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर कर चुके थे. हालांकि मध्यस्थता में शामिल एक राजनयिक ने इस दावे से इनकार किया है. वहीं अन्य सूत्रों का कहना है कि रविवार और बुधवार दोनों दिन अलग-अलग स्तर पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया हुई थी. इन विरोधाभासी दावों के कारण समझौते की समयरेखा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है.
इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि 19 जून को जिनेवा में प्रस्तावित बैठक का स्वरूप क्या होगा. कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अब किसी नए समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे, जबकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.
जानकारी के अनुसार जिनेवा में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर गालीबाफ के नेतृत्व में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार हो सकती है. माना जा रहा है कि इस बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और समझौते के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर औपचारिक चर्चा शुरू की जाएगी.