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इंसानियत शर्मसार! मासूम बच्चे की लाश डिब्बे में ले जाने पर मजबूर हुआ पिता, अस्पताल ने एंबुलेंस देने से किया इनकार

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में एक नवजात शिशु की मौत के बाद उसके पिता को बच्चे का शव कार्डबोर्ड बॉक्स में रखकर घर ले जाना पड़ा, क्योंकि अस्पताल ने एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई.

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Edited By: Antima Pal
इंसानियत शर्मसार! मासूम बच्चे की लाश डिब्बे में ले जाने पर मजबूर हुआ पिता, अस्पताल ने एंबुलेंस देने से किया इनकार
Courtesy: x @yoursudarshan

झारखंड: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में एक नवजात शिशु की मौत के बाद उसके पिता को बच्चे का शव कार्डबोर्ड बॉक्स में रखकर घर ले जाना पड़ा, क्योंकि अस्पताल ने एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई. यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुर्खियों में आया है.

मासूम बच्चे की लाश डिब्बे में ले जाने पर मजबूर हुआ पिता

घटना के अनुसार कराइकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम ने अपनी गर्भवती पत्नी रीता तिरिया को 5 मार्च को चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था. शनिवार को रीता ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन दुर्भाग्य से नवजात की मौत हो गई. रामकृष्ण का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बच्चे के शव को गांव (लगभग 12 किमी दूर) ले जाने के लिए एम्बुलेंस या कोई अन्य वाहन देने से इनकार कर दिया. मजबूरी में उन्होंने अस्पताल परिसर से एक पुराना कार्डबोर्ड बॉक्स लिया और उसमें बच्चे का शव रखकर ई-रिक्शा से घर पहुंचे. 

अस्पताल ने एंबुलेंस देने से किया इनकार

उन्होंने दावा किया कि अस्पताल के वॉर्ड बॉयज ने भी शव को जल्दी हटाने का दबाव बनाया, लेकिन कोई मदद नहीं की. इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया. रामकृष्ण ने बताया कि वे अंतिम संस्कार के लिए परेशान थे और अस्पताल की लापरवाही के कारण ऐसा करना पड़ा. हालांकि अस्पताल के प्रभारी डॉ. अंशुमान शर्मा ने इन आरोपों से इनकार किया. 

झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत जांच शुरू की

उन्होंने कहा कि परिवार ने कभी एम्बुलेंस की मांग नहीं की. अस्पताल ऐसे मामलों में 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए मुफ्त परिवहन की व्यवस्था करता है, लेकिन अनुरोध नहीं होने पर कुछ नहीं किया जा सकता. मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत जांच शुरू कर दी है. अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय सिंह ने कहा, "हम चक्रधरपुर अस्पताल में लगे आरोपों से अवगत हैं. जांच शुरू की गई है और अगर कोई लापरवाही या गलती पाई गई तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी." 

विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे. यह घटना झारखंड में ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सुविधाओं की खामियों को उजागर करती है. जहां एक तरफ सरकारी योजनाओं में मुफ्त एम्बुलेंस और बेहतर सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, वहीं ऐसी घटनाएं आम लोगों की मजबूरी और लाचारी को दिखाती हैं. उम्मीद है कि जांच से दोषियों पर कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा.