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झारखंड सरकार का माओवादियों के खिलाफ सख्त रुख, नकेल के कसने के लिए 3 पर रखा 1-1 लाख का इनाम

झारखंड सरकार ने तीन माओवादियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया है. साथ ही नक्सल अभियान में घायल सीआरपीएफ जवानों को आर्थिक सहायता दी गई है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
झारखंड सरकार का माओवादियों के खिलाफ सख्त रुख, नकेल के कसने के लिए 3 पर रखा 1-1 लाख का इनाम
Courtesy: Pinterest

रांची: माओवादियों पर नकेल कसने के लिए झारखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. तीन माओवादियों के खिलाफ हेमंत सोरेन सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इनाम घोषित किया है. सरकार ने चाईबासा जिले की रहने वाली फूलमनी कोड़ा, कोदोमुनी कोड़ा और चोगो पूर्ति पर एक एक लाख रुपये का इनाम रखा है. 

विभाग के अनुसार ये तीनों भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े सक्रिय कैडर बताए जा रहे हैं. चाईबासा पुलिस की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार ने यह इनाम घोषित किया है. सरकार का मानना है कि इनाम घोषित होने से माओवादी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार सुरक्षा बलों द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं. 

इनाम की घोषणा का क्या है उद्देश्य?

इसी क्रम में सरकार माओवादियों के खिलाफ सख्त नीति अपना रही है. इनाम की घोषणा का उद्देश्य माओवादियों की गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण को बढ़ावा देना है. गृह विभाग ने साफ किया है कि माओवादी हिंसा के खिलाफ राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. इसी के साथ नक्सल अभियान में घायल जवानों के लिए भी सरकार ने आर्थिक सहायता जारी की है. 

क्या है 13 जुलाई 2021 की घटना?

गुमला जिले में 13 जुलाई 2021 को नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान आईईडी ब्लास्ट हुआ था. इस विस्फोट में सीआरपीएफ के जवान विश्वजीत कुंभकार गंभीर रूप से घायल हो गए थे. राज्य सरकार ने उन्हें 2.10 लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान की है. 

क्या है सरकार की प्राथमिकता?

इसके अलावा खूंटी जिले के रनिया क्षेत्र में 23 जुलाई 2012 को नक्सलियों द्वारा की गई गोलीबारी में सीआरपीएफ जवान सुनील कुमार घायल हुए थे. सरकार ने उन्हें 3.50 लाख रुपये की सहायता राशि दी है. सरकार का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियान में घायल जवानों का मनोबल बढ़ाना प्राथमिकता है. राज्य सरकार न सिर्फ माओवादियों पर कार्रवाई कर रही है बल्कि सुरक्षा बलों के कल्याण पर भी विशेष ध्यान दे रही है. 

झारखंड में माओवाद प्रभावित इलाकों में विकास और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई जा रही है. इन कदमों से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि हिंसा के रास्ते पर चलने वालों के खिलाफ सख्ती होगी और देश की सुरक्षा में लगे जवानों को पूरा सम्मान और सहयोग मिलेगा.