रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने झारखंड सरकार के साथ बातचीत के लिए सहमति जता दी है. हालांकि, छात्रों ने स्पष्ट किया कि बैठक पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए. उनका कहना है कि इससे बातचीत का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और किसी भी तरह के भ्रम या विवाद की संभावना नहीं रहेगी.
सैकड़ों छात्र पिछले कई दिनों से 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलनकारी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि भर्ती एजेंसियों में पारदर्शिता की कमी के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है.
VIDEO | Ranchi: Agitating students agree to hold discussion with Jharkhand government; demand for video recording of the meeting.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 5, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/We2ub1yw2F
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक केवल झारखंड का नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों के युवाओं से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और जांच एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं. मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के दरवाजे सभी छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए खुले हैं तथा वे अपनी मांगें और सुझाव सीधे सरकार के सामने रख सकते हैं. वहीं, आंदोलन में शामिल एक छात्र ने दावा किया कि JSSC-CGL पेपर लीक मामले की पिछली जांचों में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. इसलिए उन्हें आशंका है कि मौजूदा जांच भी समय बीतने के साथ ठंडी पड़ सकती है. इसी वजह से छात्र स्वतंत्र एजेंसियों से जांच की मांग पर कायम हैं.
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग 19 अप्रैल को आयोजित 14वीं JPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की है. इसके अलावा वे JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं की सीबीआई और ED से जांच कराने, ओएमआर शीट में 'Not Attempted' का पांचवां विकल्प जोड़ने और भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने की मांग कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए है. अब सभी की नजर सरकार और छात्रों के बीच प्रस्तावित वार्ता के नतीजों पर टिकी है.