पंजाब के लुधियाना जिले के पायल निवासी जस गोसल की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और बदलाव की मिसाल बन गई है. छह साल पहले तक वह चिट्टा, गांजा, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों की लत में पूरी तरह डूब चुके थे. गलत संगति और मानसिक दबाव ने उन्हें ऐसी राह पर पहुंचा दिया था, जिससे निकलना आसान नहीं था.
दो वर्षों तक नशे की गिरफ्त में रहने से उनका परिवार भी मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी का सामना करता रहा. लेकिन एक संयोग ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. राड़ा साहिब गुरुद्वारा के पास नशा खरीदने पहुंचे जस को जब सप्लायर नहीं मिला तो उन्होंने गुरुद्वारे में लंगर चखा. उसी दिन पहली बार उन्होंने बिना नशे के पूरा समय बिताया. यही पल उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ.
नशे से दूरी बनाने के बाद जस ने प्रतिदिन पैदल गुरुद्वारा राड़ा साहिब जाना शुरू किया. उन्होंने इस सफर के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने शुरू किए. धीरे-धीरे उनकी आदत आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ती गई और नशे की लत पूरी तरह छूट गई. इसके बाद 1 दिसंबर 2025 से उन्होंने लंबी पदयात्राओं का संकल्प लिया. एक बैग के साथ घर से निकले जस ने सबसे पहले पंजाब के प्रमुख गुरुद्वारों और ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा पूरी की. शारीरिक पीड़ा और नशे की तड़प के बावजूद उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा.
जस गोसल ने पंजाब से निकलकर महाराष्ट्र स्थित तख्त श्री हजूर साहिब तक लगभग 55 दिनों में पैदल यात्रा पूरी की. इस दौरान उन्होंने एक दिन में 70 किलोमीटर तक पैदल चलने का भी कीर्तिमान बनाया. बाद में उन्होंने सिक्किम, तेलंगाना, असम और पूर्वोत्तर भारत के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों तक अपनी यात्रा जारी रखी. इस पूरे अभियान के दौरान उन्होंने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए, जिससे लाखों लोगों को घर बैठे पांचों तख्तों और ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन का अवसर मिला.
इसी उपलब्धि के आधार पर उनका नाम इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया. उन्होंने बताया कि उन्हें आगामी 15 अगस्त को डायमंड बटन से भी सम्मानित किया जाएगा. जस गोसल का कहना है कि यदि इंसान सच्चे मन से संकल्प ले और गुरु का सहारा अपनाए तो कोई भी नशा उसे जीवनभर कैद नहीं रख सकता. उनका मानना है कि युवावस्था में सही दिशा चुनना सबसे बड़ा निर्णय होता है.