बस्तर: केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) के पद पर नियुक्त किया है. गृह मंत्रालय ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र भेजकर उनकी प्रतिनियुक्ति की जानकारी दी है और उन्हें जल्द कार्यमुक्त करने का अनुरोध किया है.
वर्ष 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी सुंदरराज पी को देश के उन अधिकारियों में गिना जाता है जिन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक काम किया है. 46 वर्षीय अधिकारी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में करीब 12 वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. इस दौरान उन्होंने सात वर्षों तक लगातार बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) या पुलिस प्रमुख के रूप में सेवा दी.
बस्तर रेंज दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात जिलों को कवर करती है और लंबे समय तक यह क्षेत्र देश में नक्सल हिंसा का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है. ऐसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में काम करते हुए सुंदरराज पी ने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई.
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के साथ मिलकर कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर में नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने, कई बड़े माओवादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है.
नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान जब भी कोई बड़ी सफलता मिली या किसी अभियान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई, तब सुंदरराज पी मीडिया के सामने प्रमुख चेहरा रहे. उन्होंने लगातार सुरक्षा स्थिति, अभियान और रणनीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं और लोगों के बीच विश्वास कायम करने का प्रयास किया.
तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले सुंदरराज पी ने कृषि विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया. अपने पेशेवर जीवन में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी नेतृत्व का परिचय दिया है.
केंद्र सरकार द्वारा उन्हें NIA में आईजी नियुक्त किया जाना उनके अनुभव और कार्यों की बड़ी पहचान माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सली संगठनों के नेटवर्क, रणनीतियों और सुरक्षा अभियानों की गहरी समझ अब देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी NIA के लिए भी उपयोगी साबित होगी.
NIA में उनकी नई जिम्मेदारी के साथ उम्मीद की जा रही है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच और आतंकवाद विरोधी अभियानों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.