रांची: झारखंड में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है. एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा को मंगलवार शाम धनबाद जिले से गिरफ्तार कर लिया गया. उसके साथ दो सक्रिय माओवादी सदस्य और दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है. सुरक्षा एजेंसियां इस कार्रवाई को पूर्वी भारत में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी उपलब्धि मान रही हैं.
पुलिस के अनुसार मिसिर बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के हरलाडीह गांव का रहने वाला है. वह कई वर्षों से झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख संचालक माना जाता रहा है. उस पर हत्या, सुरक्षा बलों पर हमले, जबरन वसूली और आईईडी विस्फोट सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं. केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने उसकी गिरफ्तारी पर कुल एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था.
झारखंड | धनबाद के बरवाड्डा थाना क्षेत्र से 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ़्तार किया गया है। यह गिरफ़्तारी कल देर शाम हुई: धनबाद SSP प्रभात कुमार
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 29, 2026
"नई दिशा - एक नई पहल"
— Jharkhand Police (@JharkhandPolice) July 28, 2026
“ऑपरेशन नवजीवन-II”
हिंसा की राह छोड़कर 16 शीर्ष भा० क० पा०(माओवादी) कमांडर अत्याधुनिक हथियार-11, मैगजीन-38, कारतूस-1562 के साथ मुख्य धारा में लौटे
झारखण्ड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति एवं सुरक्षा बलों द्वारा चलाये जा रहे अभियान का प्रभाव (1/2) pic.twitter.com/kPjVli0SWM
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक मिसिर बेसरा का प्रभाव खासकर कोल्हान, सारंडा और पारसनाथ क्षेत्र में काफी मजबूत था. वह संगठन की रणनीति तैयार करने और अलग अलग राज्यों में माओवादी नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था.
गिरफ्तारी के दौरान उसके साथ सक्रिय माओवादी सदस्य मोच्छू और सौरभ उर्फ गौरव को भी पकड़ा गया. इसके अलावा गिरिडीह और धनबाद सीमा क्षेत्र से दो ग्रामीणों को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन दोनों ग्रामीणों का माओवादी संगठन से क्या संबंध था और वे किस प्रकार की मदद कर रहे थे.
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में मिसिर बेसरा के कई करीबी सहयोगियों की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण के बाद उसका नेटवर्क कमजोर पड़ गया था. इसी के बाद उसके खिलाफ अभियान और तेज कर दिया गया.
अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान संगठन के शीर्ष नेतृत्व, हथियारों की आपूर्ति, जबरन वसूली के नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और सक्रिय नक्सलियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है. इससे माओवादी गतिविधियों पर और प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी.
इसी दिन झारखंड पुलिस के सामने 16 माओवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया. इनमें 39 लाख रुपये के संयुक्त इनाम वाले छह माओवादी शामिल थे. आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये के इनामी संतोष महतो उर्फ बसुदेव दा उर्फ दिलीप भी शामिल है, जिसके खिलाफ 128 मामले दर्ज बताए गए हैं. इसके अलावा संगठन के दो सब जोनल समिति सदस्य और दो एरिया समिति पदाधिकारी भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल रहे.
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा.