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चोरों से बचाने के लिए कबाड़ में छिपाए गहने, गलती से बेच दिए; 6 महीने बाद कबाड़ी ने मालिक को ढूंढकर किए वापस

फरीदाबाद के एक कबाड़ व्यापारी 'खान साहब' ने इंसानियत का अनोखा नमूना पेश किया है. उन्होंने छह महीने बाद एक परिवार के 15 लाख रुपये के सोने के गहने ढूंढकर वापस लौटा दिए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
चोरों से बचाने के लिए कबाड़ में छिपाए गहने, गलती से बेच दिए; 6 महीने बाद कबाड़ी ने मालिक को ढूंढकर किए वापस
Courtesy: grok

फरीदाबाद: आज के समय में जहां लोग छोटी-छोटी बातों पर भरोसा खो देते हैं, वहीं हरियाणा के फरीदाबाद से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने ईमानदारी पर नया विश्वास जगाया है. पिछले साल जनवरी में अशोक शर्मा परिवार के साथ कुंभ मेले जा रहे थे. घर खाली रहने वाला था, इसलिए उन्होंने सोने के गहने चोरों से बचाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया.

लेकिन बाद में वही तरीका मुसीबत बन गया. दीपावली की सफाई में गहने कबाड़ में चले गए और कई महीनों तक परिवार उदास रहा. आखिरकार कबाड़ी खान साहब ने ईमानदारी दिखाई और गहने लौटा दिए. यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि अच्छाई कभी नहीं मरती. 

चोरों से बचाने के चक्कर में छिपाए गहने

पिछले साल जनवरी में अशोक शर्मा कुंभ मेले के लिए निकले थे. घर सूना रहने वाला था, इसलिए उन्होंने करीब 10 तोले सोने के गहने एक पुराने डिब्बे में बंद किए और उसे कबाड़ के बोरे में छिपा दिया. उन्हें लगा कि चोर कभी बोरे की ओर ध्यान नहीं देंगे. लेकिन समय बीतने के साथ परिवार इस डिब्बे को भूल गया. 

दीपावली सफाई में हुई बड़ी भूल

दीपावली के समय घर की साफ-सफाई हुई. अनजाने में उस बोरे को कबाड़ समझकर खान साहब के गोदाम में बेच दिया गया. जब पूजन के लिए गहने निकालने की कोशिश की गई तो परिवार को सदमा लग गया. जिस सोने को चोरों से बचाया था, वही खुद के हाथों कबाड़ में चला गया था. कई दिन तक तलाश जारी रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.

छह महीने बाद मिली राहत

करीब छह महीने बाद खान साहब ने गोदाम में ढेरों कबाड़ के बीच से वह डिब्बा ढूंढ निकाला. उन्होंने तुरंत परिवार को सूचना दी. एसीपी जितेश मल्होत्रा की मौजूदगी में 100 ग्राम सोने के गहने, जिनकी कीमत 15 लाख रुपये थी, परिवार को सौंप दिए गए. अशोक शर्मा और परिवार खुशी से भर उठा.

ईमानदारी की मिसाल बने खान साहब

खान साहब के इस कदम ने साबित कर दिया कि ईमानदारी का कोई मजहब या सीमा नहीं होती. एसीपी जितेश मल्होत्रा ने कहा कि यह घटना समाज के लिए प्रेरणा है. खान साहब की नेकदिली ने न सिर्फ एक परिवार की खुशी लौटाई, बल्कि लोगों का भरोसा भी मजबूत किया कि अच्छाई आज भी जिंदा है.