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India Daily

मुफ्त बिजली के वादे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनावी साल में स्टालिन सरकार को लगाई फटकार, जानें पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को फ्री बिजली देने के वादे की कड़ी आलोचना की है. अदालत की ओर से फ्री चीजें देने के बजाए रोजगार देने पर जोर दिया गया है.

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Edited By: Shanu Sharma
मुफ्त बिजली के वादे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनावी साल में स्टालिन सरकार को लगाई फटकार, जानें पूरा मामला?
Courtesy: X (@Amockx2022, @Shubham_fd)

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को तमिलनाडु में लोगों को फ्री बिजली देने के वादे की कड़ी आलोचना की गई. अदालत ने बेनिफिशियरी की इकोनॉमिक हालत की परवाह किए बिना ऐसी घोषणा करने पर फाइनेंशियल समझदारी को लेकर सवाल किया है.

तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि भारत के अधिकतर राज्य पहले से ही रेवेन्यू-डेफिसिट में हैं. फिर भी बड़े पैमाने पर फ्री चीजों की घोषणा की जा रही है. अदालत की ओर से कहा गया कि फ्री बीज के कारण इकोनॉमिक  ग्रोथ प्रभावित हो रहे हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट  ने इस मामले पर सुनवाई  करते हुए तमिलनाडु सरकार की क्लास लगाई है. इतना ही नहीं अदालत की ओर से यह भी कहा गया कि इसके बारे में दूसरे राज्यों को भी कड़ा संदेश दिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि डेवलपमेंट प्रायोरिटीज को रखना बेहद जरूरी है. इस तरह की उदारता बांटने से देश का इकोनॉमिक डेवलपमेंट रुकने का खतरा है.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने राज्य सरकार से दिए जा रहे फ्री बीज को लेकर कड़े सवाल किया. कोर्ट ने आगे सलाह दी कि राज्यों को फाइनेंशियल हालत की परवाह किए बिना समाज के सभी वर्गों को फ्री खाना, साइकिल या बिजली जैसी एक जैसी स्कीम देने के बजाय रोजगार के मौके देने चाहिए. अदालत ने कहा कि राज्यों को सस्टेनेबल ग्रोथ के रास्ते बनाने पर ध्यान देने की जरूरत है. 

सुप्रीम कोर्ट ने फ्री बीज बंद करने का दिया आदेश ​​​​​​​

तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होना है. उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फ्री बीज बंद करने का आदेश दिया है. जस्टिस ने कहा कि हम एक ऐसे राज्य में हैं जहां सभी के पास अपने घर हैं, लेकिन फिर भी लोगों को बिजली फ्री चाहिए. अदालत ने साफ कहा कि अगर आपको कोई भी सुविधा चाहिए तो उसके लिए आपको टैक्स देने होंगे. फ्री में सबकुछ बांटकर हम समाज को कमजोर बनाने का काम कर रहे हैं. साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव से पहले इस तरह की घोषणाएं क्यों बढ़ जाती है, इसके बारे में सभी को सोचने की जरूरत हैं.