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होली-मुहर्रम पर भी अब खुलेंगी शराब दुकान! महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर भी नहीं रहेगा 'ड्राई डे', छत्तीसगढ़ सरकार का चौंकाने वाला फैसला

छत्तीसगढ़ सरकार ने नई आबकारी नीति में ड्राई डे की संख्या 7 से घटाकर 3 कर दी है. अब होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस(महात्मा गांधीकी पुण्यतिथि) पर भी शराब की दुकानें खुली रहेंगी. सरकार का कहना है कि इससे राजस्व बढ़ेगा और अवैध व्यापार रुकेगा, जबकि विपक्ष और सामाजिक संगठन इसे गलत बता रहे हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
होली-मुहर्रम पर भी अब खुलेंगी शराब दुकान! महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर भी नहीं रहेगा 'ड्राई डे', छत्तीसगढ़ सरकार का चौंकाने वाला फैसला
Courtesy: pintrest

छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल मच गई है. राज्य सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी के तहत कुछ महत्वपूर्ण त्योहारों और राष्ट्रीय दिवस पर ड्राई डे खत्म करने का फैसला लिया है. अब होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस पर भी शराब की बिक्री की अनुमति मिल जाएगी.

पहले ये दिन पूरे राज्य में शराबबंदी के तौर पर मनाए जाते थे. सरकार का दावा है कि यह कदम राजस्व बढ़ाने और अवैध शराब पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है, लेकिन इस फैसले ने कई लोगों को हैरान कर दिया है और विरोध की आवाजें भी तेज हो गई हैं.

ड्राई डे में बड़ी कटौती

नई नीति के तहत राज्य में ड्राई डे की कुल संख्या 7 से घटाकर सिर्फ 3 रह गई है. होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस जैसे संवेदनशील मौकों पर अब शराब की दुकानें बंद नहीं रहेंगी. पहले इन दिनों पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था ताकि धार्मिक भावनाओं और राष्ट्रीय महत्व का सम्मान बना रहे. यह बदलाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

सरकार का तर्क और बचाव

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि बदलते समय के हिसाब से यह कदम जरूरी था. उनका कहना है कि त्योहारों पर शराब की मांग बहुत बढ़ जाती है और लाइसेंस वाली दुकानें बंद रहने से कालाबाजारी बढ़ती है. सरकार राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान, पदयात्रा और पब्लिक प्रोग्राम भी चलाती रहेगी.

अवैध व्यापार पर लगाम का दावा

अधिकारियों का मानना है कि ड्राई डे पर अधिकृत दुकानें बंद रहने से लोग अवैध तरीके से शराब खरीदते हैं, जिससे अपराध और जहरीली शराब का खतरा बढ़ता है. नई नीति से वैध दुकानें खुली रहेंगी तो काला बाजार अपने आप कम हो जाएगा. सरकार इसे एक व्यावहारिक और प्रभावी कदम मान रही है.

विपक्ष और सामाजिक संगठनों का विरोध

विपक्षी दलों ने सरकार पर राजस्व के लिए नैतिकता कुर्बान करने का आरोप लगाया है. गांधीवादी संगठनों ने खासकर गांधी निर्वाण दिवस पर शराब बिक्री की अनुमति को महात्मा गांधी के नशा-विरोधी सिद्धांतों के खिलाफ बताया है. कई सामाजिक कार्यकर्ता इसे शराब के बढ़ते इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाला कदम बता रहे हैं और बहस तेज हो गई है.

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