menu-icon
India Daily

3 या 4 मार्च इस साल कब है होली का त्यौहार? जानिए सही तिथि और परंपरा के बारे में

होली 2026 की तिथि को लेकर असमंजस खत्म हो गया है. पंचांग के अनुसार 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी.

reepu
Edited By: Reepu Kumari
3 या 4 मार्च इस साल कब है होली का त्यौहार? जानिए सही तिथि और परंपरा के बारे में
Courtesy: ANI

नई दिल्ली: रंगों का पर्व होली हर उम्र के लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है. जैसे-जैसे मार्च नजदीक आता है, लोगों के मन में एक ही सवाल उठता है कि इस बार होली किस दिन मनाई जाएगी. साल 2026 में भी यही चर्चा है कि त्योहार 3 मार्च को है या 4 मार्च को. अब पंचांग ने इस भ्रम को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है.

हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. धार्मिक मान्यता के साथ-साथ यह त्योहार सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी देता है. आइए जानते हैं होली 2026 की सही तिथि और इससे जुड़ी मान्यताएं.

होलिका दहन और रंगों की होली की तिथि

वैदिक पंचांग के मुताबिक 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाएगा. इसके अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 को रंगों वाली होली मनाई जाएगी. परंपरा के अनुसार पहले दिन बुराई के प्रतीक होलिका का दहन होता है और दूसरे दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशियां बांटते हैं. यही क्रम हर वर्ष निभाया जाता है.

प्रह्लाद और होलिका की कथा

होली के पीछे भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकशिपु और होलिका की प्रसिद्ध कथा जुड़ी है. मान्यता है कि अहंकारी राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने का प्रयास किया. अंत में होलिका अग्नि में बैठी, लेकिन वरदान का दुरुपयोग करने पर वह स्वयं जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गए. इसी स्मृति में होलिका दहन किया जाता है.

देशभर में अलग-अलग नाम

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में होली को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. कहीं इसे होरी और डोलयात्रा कहा जाता है तो कहीं कामदहन और शिमगा के रूप में मनाया जाता है. कोंकण और गोवा में शिग्मो तो बंगाल में डोल पूर्णिमा के नाम से यह पर्व प्रसिद्ध है. ब्रज क्षेत्र में फूलों की होली और लट्ठमार होली विशेष आकर्षण का केंद्र होती है.

धार्मिक और सामाजिक महत्व

होली केवल रंग खेलने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता का प्रतीक भी है. इस दिन लोग पुराने मतभेद भुलाकर गले मिलते हैं और रिश्तों में नई मिठास घोलते हैं. आध्यात्मिक रूप से यह पर्व अहंकार और द्वेष को त्यागने का संदेश देता है. इसलिए होली को आत्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव भी कहा जाता है.

Topics