चंडीगढ़: हरियाणा सरकार अब बजट तैयार करने की प्रक्रिया में भविष्य की चुनौतियों को भी शामिल करने जा रही है. अब विभागों को सिर्फ यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि मौजूदा बजट में पैसा कहां और कैसे खर्च किया जाना है. उन्हें यह भी बताना होगा कि आज की योजनाएं वर्ष 2047 तक प्रदेश की जरूरतों को पूरा करने में कितनी प्रभावी रहेंगी.
सरकार ने सभी विभागों को भविष्य में सामने आने वाली कम से कम एक बड़ी चुनौती की पहचान करने और उसका पूरा खाका तैयार करने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य हरियाणा विजन-2047 के लक्ष्यों के अनुरूप लंबे समय की योजनाएं तैयार करना है.
इस कवायद के तहत विभागों को ऐसी समस्या चुननी होगी जिसका आने वाले वर्षों में सेवा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, तकनीक या उनके संबंधित क्षेत्र पर बड़ा असर पड़ सकता है. सामान्य और रोजमर्रा की समस्याओं को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा.
चयनित चुनौती का हरियाणा विजन-2047 से सीधा संबंध भी बताना होगा. विभागों को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित समस्या भविष्य में प्रदेश के विकास को किस तरह प्रभावित कर सकती है और उसे समय रहते दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं.
सरकार ने विभागों से सिर्फ अनुमान या दावे के आधार पर भविष्य की समस्या बताने के बजाय ठोस आंकड़ों के साथ उसका आधार पेश करने को कहा है. इसके लिए विभागों को मौजूदा स्थिति, पिछले वर्षों के आंकड़े, प्रमुख संकेतक और उनमें हुए बदलाव के रुझान जुटाने होंगे.
जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों या क्षेत्रों से तुलना भी की जाएगी. इसके आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि आने वाले वर्षों में संबंधित समस्या कितनी गंभीर हो सकती है. साथ ही इससे पैदा होने वाले नए जोखिमों और संभावित अवसरों की भी पहचान करनी होगी.
प्रत्येक विभाग को अपनी चुनी हुई भविष्य की चुनौती पर दो स्लाइड की प्रस्तुति तैयार करनी होगी. इसमें समस्या की पहचान से लेकर उसके संभावित समाधान तक की जानकारी संक्षिप्त रूप में देनी होगी. इस प्रक्रिया के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने उप निदेशक सुरेंद्र सैनी को नोडल अधिकारी बनाया है. इसके अलावा अलग-अलग विभागों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए भी नोडल अधिकारियों की व्यवस्था की जा रही है.
सरकार की इस कवायद का उद्देश्य बजट को सिर्फ मौजूदा जरूरतों तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है. इससे 2047 तक हरियाणा के विकास की दिशा में लंबी अवधि की योजनाओं को प्राथमिकता देने और संभावित चुनौतियों के लिए पहले से तैयारी करने पर जोर दिया जाएगा.