दिल्ली सरकार ने आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं समय पर उपलब्ध कराने और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से अहम फैसला लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली नागरिकों का समयबद्ध व सुगम सेवा प्रदाय का अधिकार विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी गई.
इस विधेयक को अब विधानसभा में पेश किया जाएगा. इसके लागू होने के बाद अधिसूचित सरकारी सेवाओं को तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी होगी.
नए कानून के तहत यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय में नागरिक को सेवा उपलब्ध नहीं कराता है तो उस पर प्रतिदिन 250 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. यह जुर्माना अधिकतम 5,000 रुपये तक हो सकता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना और नागरिकों को समय पर सेवाएं दिलाना है.
सरकार के अनुसार यह नया कानून वर्ष 2011 के मौजूदा कानून का स्थान लेगा. इसके तहत आवेदन से लेकर सेवा मिलने तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा. प्रत्येक आवेदन को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक अपनी फाइल की स्थिति वास्तविक समय में देख सकेंगे. इससे सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और सेवा वितरण अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनेगा.
विधेयक की सबसे खास व्यवस्था स्वचालित शिकायत अग्रेषण है. यदि नामित अधिकारी समय पर सेवा उपलब्ध नहीं कराता है तो नागरिक को अलग से अपील करने की आवश्यकता नहीं होगी. मामला स्वतः संबंधित नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी के पास पहुंच जाएगा. यदि वहां भी समय पर निर्णय नहीं होता है तो प्रकरण अपने आप दिल्ली सेवा का अधिकार आयोग के समक्ष भेज दिया जाएगा.
प्रत्येक विभाग में स्वतंत्र शिकायत निवारण प्राधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो सेवा में देरी, आवेदन अस्वीकार होने या अन्य शिकायतों पर फैसला देंगे. सामान्य परिस्थितियों में अपीलों का निस्तारण 30 दिनों के भीतर करने का प्रावधान रखा गया है. साथ ही एक स्वतंत्र दिल्ली सेवा का अधिकार आयोग गठित किया जाएगा. यह आयोग द्वितीय अपीलों की सुनवाई करेगा, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, विभागों का निरीक्षण करेगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकेगा.