Green Crackers In Delhi: अगर सुप्रीम कोर्ट ग्रीन पटाखे फोड़ने पर बैन हटाता है, तो दिल्ली सरकार तुरंत कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है. हालांकि अदालत ने अभी अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन उसने पहले ही कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध न तो व्यावहारिक है और न ही आदर्श, क्योंकि लोग अक्सर ऐसे नियमों का उल्लंघन करते हैं. अदालत ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
इसके जवाब में, दिल्ली सरकार ने दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान प्रदूषण न बढ़े, यह सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत योजना साझा की है भले ही ग्रीन पटाखों की अनुमति हो. अधिकारियों के अनुसार, प्रदूषण को नियंत्रित करने और प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और उपयोग पर नजर रखने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे:
त्योहारों के दौरान अवैध पटाखों से संबंधित शिकायतें प्राप्त करने के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा. इससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
विशेष प्रवर्तन दल बनाए जाएंगे. इनमें दिल्ली पुलिस, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारी शामिल होंगे. इनका काम प्रतिबंधित या उच्च प्रदूषण वाले पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को रोकना होगा.
दिल्ली के लोग समीर ऐप, ग्रीन दिल्ली ऐप और अन्य आधिकारिक वेबसाइटों जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके आसानी से उल्लंघनों की रिपोर्ट कर सकेंगे. इससे नियमों का पालन न करने वालों को पकड़ने में मदद मिलेगी.
सरकार लोगों को यह बताने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाएगी कि कौन से ग्रीन पटाखे इस्तेमाल करने की अनुमति है और दिल्ली की हवा को स्वच्छ रखने के लिए नियमों का पालन करना क्यों जरूरी है.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा, 'अगर पटाखों पर प्रतिबंध हटा लिया जाता है, तो हम तुरंत एक बैठक करेंगे और अदालत के निर्देशों के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाएंगे.' इससे पहले, मनजिंदर सिंह सिरसा ने यह भी बताया था कि दिल्ली सरकार दिवाली और गुरुपर्व के दौरान सुबह और शाम कम से कम एक-एक घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति देने के पक्ष में है, ताकि लोग ज्यादा प्रदूषण फैलाए बिना जश्न मना सकें.
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि सख्त प्रतिबंध हमेशा कारगर नहीं होते. दिल्ली सरकार ने अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण और लोगों को जागरूक करने के लिए उठाए गए सभी कदमों का जिक्र है.