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दिल्ली आबकारी केस सुनवाई में बड़ा मोड़, हाईकोर्ट में आज केजरीवाल खुद रख सकते हैं अपना पक्ष

दिल्ली आबकारी नीति मामले में आज हाईकोर्ट में अहम सुनवाई है, जिसमें अरविंद केजरीवाल के खुद पेश होकर पक्ष रखने की संभावना है. केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को ED द्वारा दायर एक याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
दिल्ली आबकारी केस सुनवाई में बड़ा मोड़, हाईकोर्ट में आज केजरीवाल खुद रख सकते हैं अपना पक्ष
Courtesy: @Amockx2022 X account

नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी कानूनी लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. अरविंद केजरीवाल जिन्हें निचली अदालत ने बरी कर दिया था, उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अदालत में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से किसी दूसरी बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की है.

यह याचिका ऐसे समय सामने आई है जब इस मामले की सुनवाई निर्णायक दौर में पहुंच रही है. AAP की कानूनी टीम के अनुसार अरविंद केजरीवाल के सोमवार को अदालत में पेश होने की उम्मीद है. खबरों के मुताबिक इस पेशी के दौरान वे खुद अदालत के सामने अपनी दलीलें रख सकते हैं. जिसके वजह से इस सुनवाई का महत्व और बढ़ गया है. विशेष रूप से हाईकोर्ट में CBI द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई होनी है.

इस याचिका में क्या है?

यह याचिका दिल्ली आबकारी नीति मामले में सभी आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देती है. इस याचिका के माध्यम से ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलटने की कोशिश की जा रही है, जिसने आरोपियों को राहत दी थी. इसके अलावा आबकारी नीति मामले से जुड़े एक अन्य संबंधित मामले में हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है.

ED की याचिका पर कब होगी सुनवाई?

प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत ने 22 अप्रैल की समय सीमा तय की है. यह मामला निचली अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों और जांच एजेंसियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों से संबंधित है. अदालत की कार्यवाही के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह अंतिम अवसर है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब दाखिल नहीं किए गए, तो प्रतिवादियों के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है.

ED ने क्या दिया है तर्क?

प्रवर्तन निदेशालय की याचिका विशेष रूप से उस घटना से संबंधित है जहां निचली अदालत ने जांच एजेंसियों के संबंध में प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं. अपनी याचिका में ED ने तर्क दिया है कि ये टिप्पणियां CBI के मामले से असंगत थीं और उन्हें उनका पक्ष सुने बिना ही किया गया था. जांच एजेंसी का तर्क है कि ये टिप्पणियां 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं. इससे एजेंसी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच रहा है.

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में वह फैसला है, जिसमें केजरीवाल और सिसोदिया को बरी कर दिया गया था. सीबीआई ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है. इस बीच ED ने अदालत की इन टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है. इस याचिका पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है. इस मामले की अगली सुनवाई अब 22 अप्रैल को तय की गई है. उस दिन यह साफ हो जाएगा कि प्रतिवादी अपना जवाब दाखिल करते हैं या नहीं.