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दिल्ली एयरपोर्ट पर ATC सिस्टम ठप, 100 फ्लाइट्स पर असर, जानिए कैसे काम करता है एयर ट्रैफिक कंट्रोल

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर AMSS सिस्टम के ठप होने से करीब 100 फ्लाइट्स की आवाजाही प्रभावित हुई. एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को मैन्युअल मोड पर काम करना पड़ा.

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Edited By: Reepu Kumari
दिल्ली एयरपोर्ट पर ATC सिस्टम ठप, 100 फ्लाइट्स पर असर, जानिए कैसे काम करता है एयर ट्रैफिक कंट्रोल
Courtesy: Pinterest

दिल्ली एयरपोर्ट पर शुक्रवार को एक बड़ी तकनीकी समस्या देखने को मिली, जब ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) अचानक ठप पड़ गया. इस वजह से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को मैन्युअली फ्लाइट डेटा प्रोसेस करना पड़ा, जिससे करीब 100 फ्लाइट्स की आवाजाही प्रभावित हो गई. यात्रियों को लंबा इंतजार झेलना पड़ा और कई उड़ानें देरी से रवाना हुईं. ATC यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल, हवाई जहाजों की सुरक्षा और उड़ानों के संचालन में अहम भूमिका निभाता है.

यह सिस्टम हवाई जहाजों को आसमान में ट्रैक करता है और उनके बीच दूरी बनाए रखने में मदद करता है. दिल्ली एयरपोर्ट पर आई तकनीकी खराबी ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि आधुनिक हवाई परिवहन में तकनीक का रोल कितना अहम है.

क्या है ATC सिस्टम?

ATC (Air Traffic Control) हवाई जहाजों की ट्रैफिक पुलिस की तरह काम करता है. यह उड़ानों की दिशा, ऊंचाई और गति को नियंत्रित करता है ताकि कोई टक्कर न हो. इसमें कई सब-लेवल होते हैं जैसे ग्राउंड कंट्रोल, टावर कंट्रोल और अप्रोच कंट्रोल, जो मिलकर हवाई ट्रैफिक को सुरक्षित बनाते हैं.

AMSS क्यों है जरूरी?

AMSS (Automatic Message Switching System) ATC का वह हिस्सा है जो उड़ानों से जुड़ी जरूरी सूचनाओं को तेज़ी से एक जगह से दूसरी जगह भेजता है. जब यह सिस्टम ठप पड़ जाता है, तो कंट्रोलर को मैन्युअल रूप से फ्लाइट डेटा दर्ज करना पड़ता है, जिससे समय और सटीकता दोनों प्रभावित होते हैं.

ATC सिस्टम कैसे काम करता है?

ATC रडार, रेडियो और डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए पायलट्स से संपर्क रखता है. यह फ्लाइट की पोजीशन, ऊंचाई और दिशा को मॉनिटर करता है और सुरक्षित मार्ग तय करता है. टेकऑफ से लेकर लैंडिंग तक हर आदेश कंट्रोलर की निगरानी में होता है.

क्यों जरूरी है तकनीकी अपडेट?

भारत के बड़े एयरपोर्ट्स जैसे दिल्ली और मुंबई में नया IP-AMSS सिस्टम लगाया गया है जो 99% समय बिना रुकावट चलता है. लेकिन किसी भी तकनीकी गड़बड़ी से ट्रैफिक सिस्टम पर भारी असर पड़ सकता है. ऐसे में बैकअप सिस्टम और AI-आधारित मॉनिटरिंग भविष्य में जरूरी साबित होगी.

यात्रियों पर पड़ा असर और एहतियाती कदम

ATC सिस्टम की तकनीकी खराबी का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा. कई यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा जबकि कुछ फ्लाइट्स को रद्द भी करना पड़ा. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क और अतिरिक्त सूचना काउंटर लगाए. वहीं तकनीकी टीम ने सिस्टम की मरम्मत के साथ-साथ बैकअप व्यवस्था को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए.